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Ramadan 2026: रमजान में क्यों और कैसे पढ़ी जाती है तरावीह? जानिए इस खास नमाज को पढ़ने का सही तरीका और दुआ
Taraweeh Namaz Ramadan 2026: रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नवां महीना होता है। रमज़ान की शुरुआत चांद दिखने पर होती है। इसी हिसाब से इसकी तारीख तय होती है। रमज़ान के खत्म होने पर ईद-उल-फितर मनाई जाती है। सऊदी अरब में 17 फरवरी को चांद दिखाई दिया और पहली तरावीह अदा की गई। वहीं, भारत में रमजान महीने की शुरुआत 19 फरवरी से हो रही है। रमजान का महीना मुसलमानों के लिए बरकतों वाला होता है। यह महीना सब्र, इबादत और नेक कामों का महीना माना जाता है। इस महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं, नमाज पढ़ते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। रमज़ान के महीने में पांच वक्त की नमाज़ के साथ एक खास नमाज़ भी पढ़ी जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं। यह नमाज़ ईशा की नमाज़ के बाद अदा की जाती है। तरावीह नमाज के दौरान कुछ खास दुआएं भी पढ़ी जाती हैं। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि तरावीह क्या है, इसकी दुआ क्या है, नियत कैसे की जाती है और नमाज पढ़ने का तरीका क्या है -

तरावीह क्या है? (Taraweeh ki Namaz kya Hai)
तरावीह एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है आराम करना या ठहरना। यह नमाज़ रमज़ान में ईशा के बाद पढ़ी जाती है। आमतौर पर इसमें 20 रकात होती हैं और हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है। यह नमाज़ सुन्नत मानी जाती है। तरावीह की नमाज़ में कुरान की तिलावत की जाती है। मस्जिदों में इमाम पूरा कुरान रमज़ान में मुकम्मल करते हैं। यह तरीका पैगम्बर मोहम्मद की सुन्नत से जुड़ा माना जाता है।
तरावीह की दुआ (Taraweeh ki Dua)
तरावीह की नमाज़ के दौरान चार रकात के बाद जो दुआ पढ़ी जाती है, उसे तरावीह की दुआ कहा जाता है। यह दुआ अल्लाह की बड़ाई और उसकी ताकत को बयान करती है।
हिंदी में तरावीह की दुआ (Taraweeh ki Dua in Hindi)
सुबहान ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुब्हान ज़िल इज्ज़ति वल अज़मति वल हय्बति वल कुदरति वल किबरियाई वल जबरूत, सुबहानल मलिकिल हैय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमुतू सुब्बुहून कुददुसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर रूह, अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन नारि या मुजीरू या मुजीरू या मुजीर
उर्दू में तरावीह की दुआ (Taraweeh ki Dua in Urdu)
سبحان ذي الملك و الملكوت سبحان ذي العزة و الجبروت سبحان الحي الذي لا يموت
سبحان الذي خضعت لعظمته الرقاب سبحان الذي ذلت لجبروته الصعاب سبحان رب الأرباب مسبب الأسباب
سبحان خالق الخلق من تراب سبحان الذي في السماء
سبحان خالق الخلق من تراب سبحان الذي في السماء عرشه و في الأرض سلطانه
سبحان الذي لا تراه في الدنيا العيون و لا تخالطه الظنون
इंग्लिश में तरावीह की दुआ (Taraweeh ki Dua in English)
Subhana zil mulki wal malakut। Subhana zil izzati wal azmati wal haibati wal qudrati wal kibriya ay wal jabaroot। Subhanal malikil hayyil lazi la yanaamo wala yamato subbuhun quddusun rabbuna wa rabbul malaikati war ruh-allahummaajirna minan naar ya mujiro ya mujiro ya mujeer।
तरावीह की नियत (Taraweeh ki Niyat)
तरावीह की नमाज़ पढ़ने से पहले नियत करना जरूरी होता है। नियत दिल में की जाती है, लेकिन उसे जुबान से भी कहा जा सकता है।
पुरुषों के लिए नियत (Taraweeh Ki Niyat For Men)
नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के लिए, वक्त इशा का, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ। अल्लाहु अकबर।
महिलाओं के लिए नियत (Taraweeh Ki Niyat For Women)
नियत करती हूं मैं दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह की, अल्लाह तआला के लिए, वक्त इशा का, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ। अल्लाहु अकबर।
तरावीह की नमाज़ पढ़ने का तरीका (Tarabi ki Namaz Padhne ka Tarika)
तरावीह की नमाज़ ईशा की फर्ज नमाज़ के बाद पढ़ी जाती है।
हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है।
चार रकात के बाद थोड़ा ठहर कर दुआ पढ़ी जाती है।
अगर मस्जिद में पढ़ रहे हैं तो इमाम के पीछे नमाज़ अदा की जाती है।
घर पर भी तरावीह पढ़ी जा सकती है, चाहे अकेले या परिवार के साथ।
मस्जिदों में रमज़ान के दौरान पूरा कुरान सुनाया जाता है।
तरावीह की दुआ के फायदे (Taraweeh ki Dua ke Fayde)
तरावीह की नमाज़ पढ़ने से कई फायदे बताए गए हैं। रमज़ान में ज्यादा इबादत करने का मौका मिलता है। कुरान सुनने और समझने का अवसर मिलता है, जिससे रोजादारों दिल को सुकून मिलता है। साथ ही, तरावीह की नमाज़ पढ़ने से अल्लाह की रहमत और बरकत की उम्मीद की जाती है। तरावीह रमज़ान की खास पहचान है। यह सिर्फ एक नमाज़ नहीं, बल्कि अल्लाह के करीब होने का जरिया है।



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