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Ramadan Fasting Rules: फिदिया से लेकर क़फ्फारा तक हर मुसलमान को पता होने चाहिए ये रमजान रूल्स
इस्लामिक मंथ का 9वां महीना रमजान शुरू हो चुका है। ये महीना काफी पाक महीना माना जाता है। इस महीने में ही अल्लाह पाक ने पैगम्बर मोहम्मद साहब पर कुरआन-ए-पाक को नाजिल किया था। रमजान का महीना एक मुसलमान के लिए काफी अहमियत रखता है, या काफी बरकत वाला महीना होता है, जिसमें इस्लाम को मानने वाला रोजा रखकर, बताए हुए रूल्स को फॉलो करके अपनी रूह को पाक करता है।

रमजान के महीनें में रोजा रखने वालों को कुछ रूल को फॉलो करना होता है, अगर वो उन रूल्स को तोड़ते हैं या फिर सही से फॉलो नहीं करते हैं तो उनको रोजा नहीं माना जाता है, साथ ही रोजा मकरूह (खराब) भी हो जाता है। सुबह के वक्त सहरी करने के बाद फिर जब सूरज डूबता है, मग़रीब की अजान के बाद रोजा खोला जाता है, इस दौरान कोई मुस्लिम कुछ खा-पी नहीं सकता है। इसके अलावा भी बहुत सारे काम ऐसे होते हैं जो मना होते हैं, उनके करने का मतलब है कि अपना रोजा और इबादत को खराब कर लेना। तो आइये जानते हैं उन रूल्स के बारें में जिनको मानना हर रोजा रखने वाले रोजेदार को जरूरी और कंपलसरी होता है-

रोजे के दौरान ख्नाना-पीना-
रोज़े के दौरान कुछ भी खाने और पीने से परहेज करना चाहिए। मग़रिब अज़ान से पहले पानी नहीं पीना चाहिए और न ही खाना खाना चाहिए।
स्मोकिंग
रमजान में रोजा रखना वाला स्मोकिंग नहीं कर सकता है। नहीं तो उसका रोजा टूट जाता है।
उल्टी करना
जबरदस्ती उल्टी करने से रोजा टूट जाता है।
किसी को गाली देना या बुरा बोलना-
किसी को बुरा या फिर गाली गलौज करने से भी आप का रोजा खराब हो जाता है। मुसलमान अगर किसी बुरे काम में या फिर आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं तब भी रोजा खराब हो जाता है।
च्यूइंगम चबाना
रमज़ान में रोजे के दौरान च्यूइंगम चबाने से भी रोजा टूट जाता है।
तेज म्यूजिक या गाने ना सुनना, अगर कोई इबादत कर रहा है और आप तेज म्युजिक सुन रहे हैं तो ऐसा करना भी आपको गुनाह में शामिल कर देता है।
समय की बर्बादी
समय बर्बादी भी रमजान में मना है। अगर आप रोजा रखकर खाली बैठे हैं, या फिर पूरा दिन सो रहे हैं, या फिर कोई गेम खेल रहे हैं तो ऐसा करने से भी रोजा मकरूह हो जाता है।
अनुशासन बहुत अहम
रमजान में सिर्फ खाने-पीने से ही परहेज नहीं बल्कि अनुशासन बनाना बहुत जरूरी है। आत्म-संयम अहम है।
किसे रोजा रखने की छूट है-
जो कोई बीमार है या रमजान के दौरान यात्रा कर रहा है, उसे रोजा रखने से छूट है, लेकिन रमजान के बाद उसे अपने छूटे हुए रोजे रखने होंगे।
उस महीला को -
जो गर्भवती, मासिक धर्म या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को रोजा रखने से छूट है, लेकिन उसे बाद में अपने रोजे पूरे करने होंगे।
बुजुर्ग या बीमार को
गंभीर रूप से, मानसिक रूप से बीमार लोगों, बुजुर्ग और लंबे समय से बीमार लोगों को रोजा रखने की छूट है। लेकिन इसका फिदिया देना पड़ता है

फिदिया क्या है?
जब कोई शख्स किसी वजह से रमज़ान में रोज़ा नहीं रख सकता है और उसके बाद भी वो रोजा नहीं रख सकता तो उसे फिदिया देना होता है। बुजुर्ग, या खराब स्वास्थ्य के कारण, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली या मासिक धर्म वाली महिलाओं को किसी भूखे शख्स को खाना खिलाना या फिर एक वक्त के खाने के लिए पैसे देना इसे फिदिया कहलाता है।
कफ्फारा क्या होता है ?
कफ़्फ़ारा वो मुआवज़ा है जो आपको अदा करना चाहिए। अगर आप रमज़ान के महीने में जानबूझकर बिना किसी सॉलिड रीजन के के रोज़ा तोड़ते हैं तो आपको इसका कफ्फारा करना पड़ता है, अगर आप नहीं करते तो इसमें आप गुनाह में शामिल होते हैं। कफ्फारा में व्यक्ति को 60 दिनों तक लगातार उपवास करना चाहिए।
लेकिन अगर वो ऐसा नहीं कर सकता तो उन्हें प्रति व्यक्ति एक वक्त के खाने के पैसे के हिसाब से 60 गरीबों को खाना खिलाना होगा अगर मान लें कि एक वक्त का खाना 50 रूपये है तो इस हिसाब से 60 दिन के तीन हजार रूपये आपको गरीबों को देना होगा।
रोजा रखकर कुछ खा-पी लें तो ?
रोजा तभी बना रहता है अगर आपने भूल से कुछ खा लिया है, लेकिन तुरंत तौबा कर ली है अभी भी वैलिड रहेगा।
सेक्स करने से क्या रोजा टूट जाता है?
अगर आपने रोज़े के दौरान सेक्स किया है, तो आपका रोज़ा टूट जाता है। इसका कफ़्फ़ारा करना चाहिए। फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए सुबह सेहरी से पहले और इफ्तार के बाद बना सकते हैं, लेकिन रोजे के दौरान नहीं बनाया जा सकता है। रोजे के दौरन मास्टरबेशन की अनुमति नहीं है। लेकिन नींद के दौरान डिस्टार्ज हो जाए तो रोजा बना रहता है।
दांत साफ़ करना
आप अपने दांत ब्रश कर सकते हैं और अपना मुँह कुल्ला कर सकते हैं, लेकिन किसी भी पानी को निगलने की अनुमति नहीं है, या आप उपवास को अमान्य कर देंगे।
रोजे के दौरान नहाना या तैरना
रोजे के दौरान नहा सकते है, तैर सकते हैं, जब तक आप कोई पानी नहीं निगलते।



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