Latest Updates
-
Japan Mango Ban: जापान में सबसे ज्यादा कौन सा आम खाया जाता है? 20 साल बाद भारतीय आमों पर लगाया प्रतिबंध -
Restaurant Style Jeera Aloo Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा चटपटा और कुरकुरा जीरा आलू -
World No Tobacco Day: स्मोकिंग की लत से छुटकारा चाहिए? ये 5 घरेलू उपाय बीड़ी-सिगरेट छोड़ने में करेंगे आपकी मदद -
World No Tobacco Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व तंबाकू निषेध दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
Bihari Breakfast Special Dahi Chura Recipe: पारंपरिक स्वाद के साथ झटपट तैयार करें -
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी -
Param Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है परम एकादशी? नोट करें सही डेट और पारण का समय -
माचा नहीं हल्दी, केल नहीं मोरिंगा: विदेशी सुपरफूड्स से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं भारत के ये 5 देसी खजाने -
आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, जानें सेहत को होने वाले नुकसान
Ramzan Ke Teesre Ashre Ki Dua: जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए तीसरे और आखिरी अशरे में पढ़ें ये दुआ
Dua For Last 10 Days Of Ramadan: दुनियाभर के मुसलमानों के लिए इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना इबादत के होते हैं। हर उम्र के लोगों को इस महीने का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस मुकद्द्स महीने में, मुसलमान नीयत से रोज़ा रखते हैं और पांचों वक्त की नमाज़ा अता करते हैं, जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते हैं। सबका यही मकसद रहता है कि अल्लाह के दूसरे भाई-बंधु भी ख़ुशी के साथ अल्लाह को याद कर सकें।
सभी अल्लाह के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करते हैं। यह महीना मुसलमानों के लिए बरकत वाला महीना है। रमज़ान महीने के शुरू होते ही दुआओं का दौर भी चल पड़ता है। आइये इसी सिलसिले में जानते हैं कि रमज़ान के तीसरे और आखिरी अशरे में कौन सी दुआ पढ़ी जाती है।

रमज़ान महीने में अशरा क्या होता है? (Ashra in Ramzan Month)
रमज़ान का महीना 29 से 30 दिन का होता है। इस्लाम में रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है जिसे अशरा कहा जाता है। अरबी में अशरा का मतलब दस नंबर होता है। रमजान के पहले दस दिन (1-10) को पहला अशरा, दूसरे 10 दिन (11-20) को दूसरा अशरा और तीसरे दस दिन (21-30) को तीसरा अशरा कहा जाता है।
इस तरह से रमज़ान महीने में 3 अशरे होते हैं। जानकारों के मुताबिक पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का माना गया है और वहीं तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है।
रमज़ान के तीनों अशरों की क्या महत्ता है? (Importance of 3 Ashra in Ramzan Month)

ऐसा माना जाता है कि रमजान के पहले अशरे यानी शुरुआती 10 दिनों में जो रोजे रखता है और नमाज अदा करता है उस पर अल्लाह की रहमत बरसती है। वहीं रमजान के अगले दस दिन यानी दूसरे अशरे में मुसलमान ऊपर वाले से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता है। रमजान के आखिरी 10 दिन यानी तीसरे अशरे में अल्लाह की इबादत करके वो खुद को जहन्नुम की आग से बचा सकता है।
रमज़ान का तीसरा अशरा (Third Ashra of Ramzan Month)
रमज़ान के महीने का तीसरा अशरा 20वें रोजे की मगरिब से शुरू होता है, जो ईद का चांद दिखाई देने तक जारी रहता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान अल्लाह की इबादत करने से जहन्नुम की आग से छुटकारा मिल जाता है।
रमजान के तीसरे अशरे की दुआ (Third Ashra Dua)
اے اللہ! مجھے جہنم کے آگ سے سے محفوظ رکھ
"अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार"
तर्जुमा: "ऐ अल्लाह पाक मुझे जहन्नुम के आग से बचा"
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications