Latest Updates
-
सौंफ और धनिया का पानी पीने से सेहत को मिलते हैं कई फायदे, जानें सेवन का सही तरीका -
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई -
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय -
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स
Ramzan Ke Teesre Ashre Ki Dua: जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए तीसरे और आखिरी अशरे में पढ़ें ये दुआ
Dua For Last 10 Days Of Ramadan: दुनियाभर के मुसलमानों के लिए इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना इबादत के होते हैं। हर उम्र के लोगों को इस महीने का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस मुकद्द्स महीने में, मुसलमान नीयत से रोज़ा रखते हैं और पांचों वक्त की नमाज़ा अता करते हैं, जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते हैं। सबका यही मकसद रहता है कि अल्लाह के दूसरे भाई-बंधु भी ख़ुशी के साथ अल्लाह को याद कर सकें।
सभी अल्लाह के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करते हैं। यह महीना मुसलमानों के लिए बरकत वाला महीना है। रमज़ान महीने के शुरू होते ही दुआओं का दौर भी चल पड़ता है। आइये इसी सिलसिले में जानते हैं कि रमज़ान के तीसरे और आखिरी अशरे में कौन सी दुआ पढ़ी जाती है।

रमज़ान महीने में अशरा क्या होता है? (Ashra in Ramzan Month)
रमज़ान का महीना 29 से 30 दिन का होता है। इस्लाम में रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है जिसे अशरा कहा जाता है। अरबी में अशरा का मतलब दस नंबर होता है। रमजान के पहले दस दिन (1-10) को पहला अशरा, दूसरे 10 दिन (11-20) को दूसरा अशरा और तीसरे दस दिन (21-30) को तीसरा अशरा कहा जाता है।
इस तरह से रमज़ान महीने में 3 अशरे होते हैं। जानकारों के मुताबिक पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का माना गया है और वहीं तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है।
रमज़ान के तीनों अशरों की क्या महत्ता है? (Importance of 3 Ashra in Ramzan Month)

ऐसा माना जाता है कि रमजान के पहले अशरे यानी शुरुआती 10 दिनों में जो रोजे रखता है और नमाज अदा करता है उस पर अल्लाह की रहमत बरसती है। वहीं रमजान के अगले दस दिन यानी दूसरे अशरे में मुसलमान ऊपर वाले से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता है। रमजान के आखिरी 10 दिन यानी तीसरे अशरे में अल्लाह की इबादत करके वो खुद को जहन्नुम की आग से बचा सकता है।
रमज़ान का तीसरा अशरा (Third Ashra of Ramzan Month)
रमज़ान के महीने का तीसरा अशरा 20वें रोजे की मगरिब से शुरू होता है, जो ईद का चांद दिखाई देने तक जारी रहता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान अल्लाह की इबादत करने से जहन्नुम की आग से छुटकारा मिल जाता है।
रमजान के तीसरे अशरे की दुआ (Third Ashra Dua)
اے اللہ! مجھے جہنم کے آگ سے سے محفوظ رکھ
"अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार"
तर्जुमा: "ऐ अल्लाह पाक मुझे जहन्नुम के आग से बचा"
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
