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Roza Rakhne Aur Kholne Ki Dua: रोज़ा मुकम्मल करने के लिए यहां पढ़ें सहरी और इफ्तारी की दुआ
Ramzan Me Roza Rakhne Aur Kholne Ki Dua: इस्लाम में रमज़ान के महीने को रहमत का महीना कहा जाता है। इस्लामिक कैलेंडर का ये नौवां महीना बरकत लेकर आता है। यही वजह है कि हर मुसलमान को माहे रमज़ान का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दौरान दुआओं का दौर शुरू हो जाता है। सभी अपना समय नेकी के कामों में और अल्लाह की बंदगी करने में बिताते हैं।
हर मुलसमान पर रोज़ा फर्ज है। माहे रमज़ान का चांद देखकर रोज़ा रखा जाता है। पूरे दिन रोज़ा रखने के बाद दुआ पढ़कर ही इफ्तार किया जाता है। इतना ही नहीं, सहरी के समय भी ख़ास दुआ पढ़ी जाती है। यहां हम आपके लिए लेकर आये हैं रमज़ान में रोज़ा रखने और खोलने के समय पढ़ी जाने वाली दुआ।

रोजा रखने की दुआ (Roza Rakhne Ki Dua)
इस्लाम में रखने के लिए सबसे पहले दुआ पढ़ने की रिवायत है। रोजा रखने का नियत करने के लिए दुआ पड़नी जरूरी है। इसके बाद अगर इंसान जाने अनजाने में कुछ खा लेता है तो वह रोज़ा नहीं माना जाएगा। नियत करने के बाद दिनभर कुछ भी खा पी नहीं सकते हैं। रोजा रखने के लिए सहरी यानी रोजा रखने की दुआ जरूर पढ़ें।
"व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमजान"
و بسومي غادين نويت من شهري رمضان
तर्जुमा: इसका मतलब होता है कि मैं रमजान के रोजे की नियत करता हूं या करती हूं।
रोजा खोलने की दुआ ( Roza Kholne Ki Dua)

सुबह सहरी के बाद इंसान दिनभर भूखा रहता है। अपना समय अल्लाह की इबादत में बिताता है। दिन ढलने के बाद एक नियत समय पर इफ्तार किया जाता है। इफ्तार में रोजेदार अपना रोज़ा खोलता है और ऐसा वो अजान के बाद ही करता है। मगरिब की अजान होने के बाद दुआ पढ़कर खजूर खाकर या पानी पीकर रोजा खोला जाता है। कुरान पाक के मुताबिक रोजा खोलने से पहले हर मुसलमान को दुआ पढ़ना वाजिब है। इफ्तार के समय रोज़ा खोलते समय यह दुआ जरूर पढ़ें।
अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु,व-बिका आमन्तु,व-अलयका तवक्कालतू,व अला रिज़किका अफतरतू
اللهمّ إني لاكا سومتو و بيكا أمانتو و عليك توكلت و على رزقك أفتارتو.
इसका मतलब होता है कि अल्लाह मैंने तेरी राजा के लिए रोजा रखा भी और तेरे ही कहने पर रोजा खोल रहा हूं या रही हूं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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