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रूसी राजनयिक ने ‘श्री गणेश’ से शुरू की प्रेस कॉन्फ्रेंस, हर शुभ कार्य से पहले क्यों होती है गणेश पूजा?
Why Ganesha is worshiped first : हाल ही में रूस से सस्ता तेल खरीदने पर अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बम फोड़ा। इस पर रूस ने भारत पर अमेरिकी दबाव को अनुचित बताया। इसी बीच भारत में रूसी मिशन के उप प्रमुख रोमन रबाबुश्किन ने भारत के साथ अपने संबंधों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत उन्होंने हिंदी में करते हुए 'श्री गणेश' कहा। यह देखकर सभी हैरान रह गए।
वैसे हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम देवता का दर्जा प्राप्त है। सभी शुभ कार्यों की शुरुआत गणेश पूजा से ही होती है। इस परंपरा के पीछे एक रोचक कहानी भी है, जो हमें गणेश जी की बुद्धिमत्ता और उनके महत्व को समझाती है। गणेश चतुर्थी आने में कुछ दिन ही शेष रह गए है, ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर हर शुभ कार्य से पहले गणेश जी का नाम सबसे पहले क्यों लिया जाता है।

गणेश और कार्तिकेय की कहानी
शिव पुराण में वर्णित एक प्रसंग के अनुसार, गणेश और उनके भाई कार्तिकेय (स्कंद या मुरुगन) के बीच यह विवाद हुआ कि कौन अधिक ज्ञानी और बुद्धिमान है। विवाद सुलझाने के लिए भगवान शिव ने दोनों के लिए एक चुनौती रखी। उन्होंने कहा कि जो पहले दुनिया के तीन चक्कर लगाकर वापस आएगा, वही अधिक बुद्धिमान माना जाएगा और उसे दिव्य आम (ज्ञान और बुद्धि का फल) मिलेगा।
कार्तिकेय तुरंत अपने मोर पर सवार होकर दुनिया के चक्कर लगाने निकल पड़ा। वह बहुत तेज़ी से चला, यह सोचकर कि वह आसानी से गणेश से आगे निकल जाएगा। दूसरी ओर, गणेश जी ने बुद्धिमानी और चतुराई से सोचा और अपने माता-पिता, भगवान शिव और माता पार्वती के चारों ओर तीन चक्कर लगाए।
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो गणेश ने उत्तर दिया कि उनके माता-पिता ही उनका संसार हैं। माता-पिता के चारों ओर चक्कर लगाकर उन्होंने अपने पूरे संसार का चक्कर लगाया। उनकी बुद्धिमानी देखकर शिव-पार्वती ने उन्हें विजेता घोषित किया और दिव्य आम दिया।
कहानी का संदेश
यह कहानी यह सिखाती है कि भौतिक शक्ति और गति की तुलना में बुद्धि, चतुराई और समझदारी अधिक महत्वपूर्ण है। साथ ही यह माता-पिता के प्रति गहरे प्रेम और सम्मान को भी दर्शाती है। इसलिए हिंदू परंपरा में गणेश जी की पूजा को सर्वप्रथम स्थान दिया गया है।
गणेश पूजा का महत्व केवल परंपरा तक ही सीमित नहीं है। गणेश ज्ञान और बुद्धि के देवता माने जाते हैं। जब हम उनका पूजन करते हैं, तो हमारे अंदर भी ज्ञान, समझदारी और सकारात्मक गुणों का विकास होता है। गणेश चेतना और आत्म-जागरूकता के प्रतीक हैं। जब चेतना जागृत होती है, तभी जीवन में ज्ञान, विवेक और प्रगति आती है।
पूजा का आध्यात्मिक फल
इसलिए गणेश पूजन केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्म-चेतना को जागृत करने का उपाय है। गणेश चतुर्थी जैसे त्योहार इस प्रतीकात्मक संदेश को प्रस्तुत करते हैं कि हमें अपने भीतर छिपे गणेश तत्व को पहचानना और जागृत करना चाहिए।
पूजा के समय गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर उन्हें अनंत श्रद्धा के साथ अर्पित करें। ध्यान और साधना के माध्यम से उनका अनुभव अपने भीतर करें। यही कारण है कि हर शुभ कार्य की शुरुआत 'श्री गणेश' कहकर की जाती है। यह न केवल शुभता का प्रतीक है, बल्कि ज्ञान, बुद्धि और सफलता की दिशा में पहला कदम भी है।



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