Saat Phere: हिंदू धर्म में सात फेरों का क्या है महत्व, जिसका इलाहाबाद कोर्ट ने भी किया जिक्र

Saat Phere: हाल ही में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि एक हिंदू विवाह 'सप्तपदी' समारोह या सात फेरों के बिना वैध नहीं है। न्यायलय के समक्ष प्रस्तुत मामले में एक पति ने अपनी अलग रह रही पत्नी पर तलाक प्राप्त लिए बिना दूसरी शादी करने का आरोप लगाया था।

कोर्ट ने पत्नी की दूसरी शादी को यह कहते हुए निरस्त किया कि हिंदू कानून के तहत वैध विवाह के लिए 'सप्तपदी' समारोह आवश्यक है। आइए जानते हैं कि सप्तपदी समारोह क्या है और प्रत्येक फेरे का क्या अर्थ है।

Saat Phere Mandatory In Hindu Marriage, Rules Allahabad Court: Know Meaning Of 7 Pheras in Hindi

सप्तपदी क्या है?

सप्तपदी का अर्थ है पवित्र अग्नि के चारों ओर सात चक्कर लगाना। हिंदू धर्म में, अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेना एक विवाह समारोह का एक महत्वपूर्ण और पवित्र तत्व होता है। इन फेरों के दौरान, दूल्हा और दुल्हन एक-दूसरे से विशिष्ट प्रतिज्ञाएं या वादे करते हुए पवित्र अग्नि के चारों ओर सात प्रतीकात्मक शुभ फेरे लेते हैं।

प्रत्येक फेरे का एक अलग अर्थ होता है जो सुखी और स्वस्थ वैवाहिक जीवन से संबंधित होता है। जहां 7 फेरों में से पहले चार फेरों में दूल्हा आगे चलता है, वहीं अंतिम तीन फेरों में दुल्हन जिम्मेदारियों और प्रतिबद्धताओं से संबंधित प्रतिज्ञा लेते हुए आगे बढ़ती है। आइये जानते हैं इनके बारे में-

पहला फेरा - प्रतिबद्धता

पहला फेरे में पति अपनी पत्नी और भावी बच्चों के पोषण और देखभाल करने और भोजन, आश्रय और धन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। और दुल्हन अपने पति के साथ साझा तौर पर जिम्मेदारी निभाने का पवित्र वचन लेती है।

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दूसरा फेरा- ताकत बनना

दूसरा फेरा जीवन की सभी परिस्थितियों में एक-दूसरे की ताकत और प्यार करने और एक जोड़े के रूप में इसे एक साथ संभालने की बात करता है। साथ ही, वे सुख-दुख के समय एक-दूसरे के साथ खड़े रहने और जीवन में भावनात्मक और शारीरिक दिक्कतों का सामना करने के दौरान एक-दूसरे का समर्थन करने की प्रतिज्ञा करते हैं।

तीसरा फेरा- आपसी सम्मान और वफादारी

शादी के तीसरे फेरे में एक-दूसरे का सम्मान करने और एक-दूसरे को बराबर मानने की कसम खाते है। वे अपनी शादी में वफादार रहने के लिए भी सहमत होते हैं। साथ ही, वे एक साथ मिलकर प्रेम और सद्भाव के साथ अपना रिश्ता आगे बढाने का वादा करते हैं।

चौथा फेरा - बिना किसी शर्त के प्यार

चौथे फेरे का मतलब एक दूसरे से बिना किसी शर्त के प्यार करना और परिवार के साथ रिश्ते को मजबूत करना। दुल्हन दूल्हे से प्यार करने और हमेशा उसके साथ रहने का वादा करती है और दूल्हा दुल्हन को अपना जीवन पूर्ण और संतुष्ट बनाने के लिए स्वीकार करता है।

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पांचवां फेरा- जिम्मेदारी का वादा

पांचवें फेरे में, दंपति भावी जीवन की ज़िम्मेदारी साथ उठाने का वादा करते हैं। वे स्वस्थ भावी संतान के लिए प्रतिज्ञा लेते हैं। वे एक-दूसरे के साथ दोस्त की तरह रहने, एक साथ समृद्ध जीवन जीने और आर्थिक और भावनात्मक जिम्मेदारियों को पूरा करने की भी कसम खाते हैं।

छठा फेरा- स्वास्थ्य

छठा फेरा स्वस्थ रहने और परिवार की भलाई को समझने के बारे में है। यह एक-दूसरे की देखभाल करने और बीमारियों और मानसिक बीमारियों से मुक्त जीवन बनाने के बारे में है ताकि वे जीवन की खुशियों और आनंद का आनंद ले सकें। साथ ही दुल्हन दूल्हे से वादा करती है कि वह जीवन की सभी ऋतुओं में उसका साथ देगी, स्वास्थ्य और बीमारी, दोनों समय में।

सातवां फेरा- साथ देना

सातवें और अंतिम चरण में, युगल बंधन पर मुहर लगाते हैं और वफादार साथी बनने का वादा करते हैं। यह फेरा पूरी तरह से साथी बनने और हमेशा या जीवन भर एक-दूसरे के साथ रहने के बारे में है। दूल्हा अपनी पत्नी से यह भी वादा करता है कि "मैं तुम्हारा हूँ और तुम अनंत काल के लिए मेरी हो।" उत्तर में दुल्हन जवाब देती हैं "जैसा कि भगवान गवाह है, मैं अब आपकी पत्नी हूं। हम हमेशा एक-दूसरे से प्यार करेंगे, सम्मान करेंगे और एक-दूसरे को संजोएंगे।"

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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