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Pitru Moksha Amavasya: पूर्वज की मृत्यु का दिन पता ना हो तो गरुड़ पुराण बताता है तर्पण करने का ये दिन
Pitru Paksha 2023: पितृ पक्ष के समय पितृ लोक के दरवाजे खोल दिए जाते हैं ताकि पितृ अपनी संतान से मिल सकें, उनकी स्थिति देख सकें। ऐसे में संतानों को अपने पितृ को प्रसन्न करने और उनको मुक्ति दिलाने के अवसर भी प्राप्त हो जाते हैं।
रामायण में श्री राम ने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था तो महाभारत में कर्ण को भी पूर्वजों का श्राद्ध करना पड़ा था। पूर्वज प्रसन्न ना हो तो पितृ दोष लगता है और संतान सुख से नहीं रह सकता है। इसलिए पूर्वजों का श्राद्ध बहुत जरुरी है।

किन्तु अगर किसी पूर्वज की मृत्यु का दिन या तिथि का पता ना हो तो फिर श्राद्ध या तर्पण कैसे करें? जैसे की मान लीजिये कोई पूर्वज यात्रा पर बाहर गया और उसकी मृत्यु हो गयी लेकिन इसकी सूचना घरवालों को बाद में मिली। ऐसे में मृत्यु की तिथि पता नहीं चली तो अब पितृ पक्ष में श्राद्ध या तर्पण किस तिथि को किया जाए? इसका उत्तर गरुड़ पुराण में हैं।
क्या है पितृ मोक्ष अमावस्या?
गरुड़ पुराण के प्रेत मंजरी के 45 वें अध्याय में इस बात का उल्लेख हैं। गरुड़ पुराण कहता है कि अगर किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि पता ना हो तो फिर पितृ पक्ष के अमावस्या के दिन जिसे पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहते हैं, श्राद्ध तर्पण या पिंडदान किया जा सकता है।
तर्पण करने वाले को सुबह सूर्योदय के समय उठकर स्नान करके अपने देवी देवताओं का स्मरण करके पूर्वज को जल देना चाहिए। जल देते समय पहले जल में अक्षत, कुश औत तिल जरुर रख दें। अगर पिंडदान करना चाहें तो फिर इसके लिए किसी पुरोहित से संपर्क कर लें क्योंकि श्राद्ध की विधि इतनी आसान नहीं होती और बिना ब्राह्मण के श्राद्ध नहीं करना चाहिए।
इसके साथ ही अपने पूर्वजों को वो सारे व्यंजन जरुर अर्पित करें जो इन्हें पसंद थे। फिर इस भोजन को कौवा, गाय, कुत्ता को खिला दें और किसी पेड़ की जड़ में भी रख दें। साथ ही उस दिन दक्षिण की दिशा में एक दीपक जलाएं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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