Latest Updates
-
UP Style Fish Machli Kadhi Recipe: घर पर बनाएं सरसों वाली चटपटी मछली कढ़ी -
Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी पर जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा सभी 24 एकादशियों का पूर्ण फल -
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर इस विधि से पिएं पानी, नहीं टूटेगा आपका व्रत, मिलेगा व्रत का पूर्ण फल -
Garhwali Sweet Rice Arsa Recipe: पारंपरिक तरीके से बनाएं उत्तराखंड की खास मिठाई -
Nirjala Ekadashi Vrat In Periods: क्या पीरियड्स में निर्जला एकादशी का व्रत रख सकते हैं? जानें क्या हैं नियम -
'तुम मुझे छोड़कर क्यों चले गए, वापस आ जाओ', केतन की हत्या के बाद सिया गोयल ने किया ये पोस्ट, अब हो रहा वायरल -
Grandma Comfort Food Vegetable Khichdi Recipe: घर पर बनाएं दादी के हाथों जैसा स्वाद -
Padma Awards 2026: अलका याग्निक-ममूटी को मिला पद्म भूषण, रोहित शर्मा और आर माधवन भी सम्मानित -
Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: निर्जला एकादशी व्रत में जरूर करें इन नियमों का पालन, तभी मिलेगा व्रत का पूरा फल -
Special Healthy Gajar Paratha Recipe: सर्दियों के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता
Sawan Kalashtami Vrat 2025: सावन में कालाष्टमी व्रत क्यों है खास? जानें महत्व, पूजा विधि, कथा और सिद्ध मंत्र
Sawan Kalashtami Vrat 2025: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पावन महीने में आने वाली कालाष्टमी तिथि का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन भगवान शिव के रौद्र और रक्षक रूप काल भैरव को समर्पित होता है। काल भैरव को 'समय का स्वामीट माना गया है और मान्यता है कि इनकी पूजा से जीवन के संकट, भय और काल के प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
सावन कालाष्टमी 2025 का व्रत न केवल पुण्य प्रदान करता है, बल्कि शत्रुओं से रक्षा, बुरी नजर से सुरक्षा और नकारात्मक शक्तियों के नाश में भी सहायक माना जाता है। इस दिन उपवास रखने, भैरव मंदिर में दर्शन करने और विशेष मंत्रों का जाप करने से काल भैरव जी जल्दी प्रसन्न होते हैं। आइए जानते हैं सावन में कालाष्टमी व्रत का महत्व, कहानी और पूजन विधि।

सावन में कालाष्टमी व्रत का महत्व
सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा की जाती है और इस महीने में आने वाली कालाष्टमी का बहुत अधिक महत्व होता है। माना जाता है कि काल भैरव शिव का रौद्र रूप हैं जो नेगेटिव शक्तियों और बुरी ताकतों को खत्म करते हैं। कालाष्टमी हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है लेकिन सावन की कालाष्टमी का विशेष महत्व होता है। यह दिन रात्रि जागरण, मंत्र जाप और भैरव चालीसा के पाठ के लिए सर्वोत्तम होता है। जीवन की सभी बाधाओं, भय, कोर्ट-कचहरी के मामलों और कालदोष से मुक्ति के लिए काल भैरव की कृपा अनिवार्य मानी जाती है। जो भक्त इस दिन श्रद्धा व नियम से व्रत रखते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, समृद्धि और बल की प्राप्ति होती है।

काल भैरव की उत्पत्ति और व्रत की पौराणिक कथा:
एक बार की बात है, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु में यह विवाद हुआ कि इनमें से सबसे श्रेष्ठ कौन है। तब उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए भगवान शिव के पास गए। ब्रह्मा जी ने अहंकार में आकर शिव जी को अपमानजनक शब्द कहे। शिव जी को यह व्यवहार बिल्कुल भी स्वीकार नहीं हुआ। उसी समय भगवान शिव ने अपने रौद्र रूप 'काल भैरव' को प्रकट किया। यह रूप इतना विकराल था कि सभी देवता कांप उठे। काल भैरव ने ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को काट दिया, क्योंकि उन्होंने शिव जी का अपमान किया था। हालांकि बाद में ब्रह्मा जी को क्षमा कर दिया गया, लेकिन इस पाप के कारण काल भैरव को ब्राह्मण हत्या का दोष लग गया। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए काल भैरव ने पूरे ब्रह्मांड की यात्रा की और अंत में काशी नगरी में प्रवेश करते ही उनका पाप समाप्त हो गया। तभी से काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है और काल भैरव को वहां नगरी का कोतवाल भी माना जाता है।
काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए मंत्र
बीज मंत्र
"ॐ भैरवाय नमः"
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से भय का नाश होता है।
भैरव गायत्री मंत्र
"ॐ कालभैरवाय विद्महे महाकालाय धीमहि, तन्नो भैरव: प्रचोदयात्"
यह मंत्र काल दोष, पितृ दोष, शत्रु बाधा से रक्षा करता है।
रक्षक मंत्र
"ॐ क्षं क्षौं क्षः कालभैरवाय स्वाहा"
रात्रि में इस मंत्र का जाप विशेष फलदायक होता है।
पूजन विधि
प्रातः स्नान कर काले वस्त्र धारण करें और भैरव मंदिर जाएं।
काले तिल, नारियल, उड़द, सरसों के तेल का दीपक अर्पित करें।
भैरव बाबा को कुत्ते को प्रिय मानते हैं, इसलिए इस दिन कुत्तों को भोजन कराना विशेष फल देता है।
शाम के समय भैरव चालीसा या भैरव अष्टक का पाठ करें।



Click it and Unblock the Notifications