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Shaniwar Vrat Katha: शनि देव की कृपा पाने के लिए जरूर पढ़ें शनिवार की व्रत कथा व आरती, साढ़े साती से मिलेगी राहत
Shaniwar Vrat Katha aur Aarti: हिंदू धर्म में सप्ताह के सभी दिन किसी न किसी देवी अथवा देवता को समर्पित माने गए हैं। भक्त दिन के अनुसार देवों का पूजन कर आशीर्वाद पाते हैं।
जिस प्रकार से सोमवार का दिन भगवान शिव, मंगलवार का दिन बजरंगबली को समर्पित है, ठीक उसी तरह शनिवार के दिन शनि देव का पूजन करने का विधान है।

कुंडली में शनि ग्रह को मजबूत करने तथा साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के लिए शनि महाराज की पूजा करना अत्यंत जरूरी माना गया है। शनिवार के दिन शनिवार व्रत कथा और शनि देव की आरती का पाठ करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
शनिवार व्रत कथा
प्रचलित शनिवार व्रत कथा के अनुसार, कुछ समय पहले की बात है, एक गांव में एक धनी व्यापारी रहते थे। उनका धन बहुत अधिक था, लेकिन उनमें अकारण घमण्ड था। वे अनेक सेवकों के साथ रहते थे, लेकिन उनका मन निराशा से भरा रहता था।
एक दिन, उन्हें अपने गांव के ज्योतिषी ने सलाह दी कि उन्हें शनिवार के दिन शनिदेव का व्रत करना चाहिए। वह व्रत करने से धन, समृद्धि और शुभकामनाएं प्राप्त कर सकते हैं। व्यापारी ने उस ज्योतिषी की सलाह को स्वीकार किया और शनिवार के दिन से ही व्रत शुरू कर दिया।
पहले कुछ समय तक व्यापारी व्रत का पालन थोड़ी समझौते के साथ करते रहे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इस व्रत के महत्व का अनुभव होने लगा। शनिवार के दिन उन्हें अपने दुःखों को भुलाने की शक्ति मिलती थी और वे ध्यान में लग जाते थे।
शनिवार के दिन धीरे-धीरे उनका व्यापार भी चमकने लगा। उनके ग्राहक और व्यापारी मित्र उनसे प्रसन्न होने लगे और उनका सम्मान करने लगे। धन के साथ-साथ उन्हें सबका स्नेह भी मिलने लगा।
एक शनिवार को व्यापारी ने बड़ा धन कमाने का लक्ष्य रखा। लेकिन व्यापार में उन्हें नुकसान हो गया और सारा पैसा खत्म हो गया। उन्हें बड़ा धक्का लगा और उनका मन अधीर हो गया।
व्यापारी दुखी होकर घर लौट रहे थे कि रास्ते में एक साधू बाबा का सामना हुआ। साधू बाबा ने उनके चेहरे की परेशानी देख ली और उनसे उनकी समस्या पूछी। व्यापारी ने सभी बातें बता दीं। साधू बाबा ने उन्हें शनिवार के व्रत के महत्व के बारे में बताया और उन्हें व्रत के प्रति सच्ची आस्था रखने की सलाह दी।
व्यापारी ने साधू बाबा के वचनों पर विश्वास किया और शनिवार के व्रत में आनंद और भक्ति से लग गए। धीरे-धीरे उनका व्यापार फिर से सफल होने लगा और वे और भी धनवान हो गए। इसके बाद, उन्होंने अपने सेवकों के साथ अच्छा व्यवहार किया और नेक कार्यों में समय बिताने लगे।
इस कथा से समझ में आता है कि शनिवार के व्रत से व्यक्ति को न केवल शनि देव की कृपा मिलती है बल्कि उसे दृढ़ता, धैर्य और समर्पण की भावना भी प्राप्त होती है। शनि देव का व्रत करने से भक्त के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शनि देव की आरती
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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