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Navratri Day 7: त्रिपुष्कर योग में होगी मां कालरात्रि की पूजा, देखें पूजन विधि, शुभ मुहूर्त, भोग, मंत्र व आरती
Navratri Day 7: मां की अराधना और शक्ति की उपासना का पर्व पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां अम्बे के नौ शक्ति स्वरुप की पूजा की जाती है। इस वर्ष 15 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्रि मनाई जा रही है।
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। 21 अक्टूबर के दिन नवरात्रि की सप्तमी होगी और मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। मां दुर्गा ने इस स्वरुप में ही शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज जैसे दानवों का वध किया था। इसलिए इस रूप को बुराइयों का अंत करने और शक्ति स्वरुप के रूप में जाना जाता है। जानते हैं शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजन विधि, पूजा मंत्र, आरती और भोग के बारे में विस्तार से -

मां कालरात्रि की पूजा विधि
21 अक्टूबर को सुबह सुबह स्नानादि से निवृत होकर मां कालरात्रि का ध्यान करें। इसके बाद पूजा घर को स्वच्छ करके कलश स्थापना की जगह पर मां कालरात्रि की तस्वीर या प्रतिमा को स्थापित करें। मां को कुमकुम और अक्षत लगायें व उनके सामने धुप और दीपक जलाएं। मां कालरात्रि को लाल रंग के फूल जैसे गुड़हल अर्पित करें।
इसके बाद मां की आरती करते हुए पूजा करें और दुर्गा सप्तशती मन्त्र के साथ साथ मां कालरात्रि मन्त्र का भी जाप करें। मां कालरात्रि अवतार की पूजा करने से भक्तों को जीवन में समृद्धि, आर्थिक उन्नति, व्यापार में लाभ, कर्ज मुक्ति और सिद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जीवन की सभी नकारात्मक शक्तियों का विनाश होता है।
सप्तमी के दिन पूजा का अभिजित मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से 11:38 बजे तक होगा। वहीं इस दिन त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, सुबह 11:24 बजे से दोपहर 01:23 बजे तक रहेगा।

मां का भोग
शारदीय नवरात्रों के सातवें दिन मां को गुड़ या मेवों से बनी चीजों का भोग लगाएं। इससे मां कालरात्रि आपके उपर आने वाले सभी संकटों से आपको दूर रखेंगी।
मां कालरात्रि पूजा मंत्र
"ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:।"
"ॐ कालरात्र्यै नम:।"
"ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।"
"दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे।
चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम ।"
मां कालरात्रि पूजा आरती
कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।
काल के मुह से बचाने वाली ॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महाचंडी तेरा अवतार ॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा ।
महाकाली है तेरा पसारा ॥
खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।
सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥
सभी देवता सब नर-नारी ।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी ।
ना कोई गम ना संकट भारी ॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें ।
महाकाली मां जिसे बचाबे ॥
तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि मां तेरी जय ॥
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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