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Shardiya Navratri 2025 : नवरात्रि में क्यों बोए जाते हैं जौ? रंग और आकार से कैसे मिलते हैं शुभ-अशुभ संकेत
Shardiya Navratri 2025 : हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना इन नौ दिनों में की जाती है। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का विधान होता है, जिसे बेहद पवित्र और मंगलकारी माना गया है।
इस दिन पूजा स्थल पर कलश की स्थापना के साथ-साथ जौ बोने की परंपरा भी निभाई जाती है। यह परंपरा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी गई है।

शारदीय नवरात्र 2025 घटस्थापना मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, शारदीय नवरात्र 2025 में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 29 सितंबर की सुबह 06 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 06 मिनट तक है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त भी घटस्थापना के लिए शुभ है, जो सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इन दोनों ही समयावधियों में घटस्थापना कर मां दुर्गा की विधिवत पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
जौ बोने का कारण
जौ को नवरात्रि में बोने की परंपरा बहुत प्राचीन है। ऐसा कहा जाता है कि सृष्टि की पहली फसल जौ ही थी और इसी कारण इसे शुभ व पवित्र माना गया। देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए जौ का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है। परंपरा के अनुसार, मिट्टी के बर्तन में या स्टील के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ बोए जाते हैं और यह पूजा स्थल पर कलश के समीप रखे जाते हैं। नवरात्र के समय जौ बोना केवल परंपरा ही नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक है। जौ का अंकुरण घर-परिवार की उन्नति, स्वास्थ्य और समृद्धि से जोड़ा जाता है। जौ का हरा-भरा होना इस बात का संकेत है कि मां दुर्गा प्रसन्न हैं और उनके आशीर्वाद से घर में खुशियां बनी रहेंगी। धार्मिक मान्यता है कि जितने अच्छे और लंबे जौ उगते हैं, घर में उतनी ही समृद्धि और खुशहाली आती है। यही कारण है कि लोग नवरात्र के दौरान जौ के अंकुरण को शुभ-अशुभ संकेत के रूप में देखते हैं।
नवरात्र में जौ उगने के शुभ संकेत
जल्दी अंकुरण होना - यदि नवरात्र के पहले या दूसरे दिन ही जौ अंकुरित हो जाएं और हरे-भरे दिखें, तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। यह घर में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य लाभ का संकेत देता है।
लंबे और घने जौ - यदि जौ सामान्य से अधिक लंबे और घने हो जाएं, तो यह घर में खुशहाली, सौभाग्य और परिवार के विस्तार का प्रतीक माना जाता है।
हरा और सफेद रंग का मिश्रण - यदि जौ हरे और सफेद रंग में उगें, तो यह संकेत है कि मां दुर्गा प्रसन्न हैं और पूजा का फल जल्द ही मिलेगा।
पीले जौ - यदि जौ पीले रंग के उगते हैं, तो इसे भी शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि घर में नई खुशियों का आगमन होने वाला है, जैसे कोई शुभ कार्य या संतान सुख।
जौ उगने के अशुभ संकेत
जैसे जौ का अच्छा और हरा-भरा होना शुभ माना जाता है, वैसे ही यदि जौ ठीक से न उगें तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है।
सूख जाना या न अंकुरित होना - यदि जौ समय पर न उगें या अंकुरण के बाद सूख जाएं, तो इसे नकारात्मक संकेत माना जाता है। इसका अर्थ है कि परिवार को किसी परेशानी या रोग का सामना करना पड़ सकता है।
रंग में असमानता - यदि जौ का रंग नीचे से हरा और ऊपर से पीला हो, तो इसे वर्ष की शुरुआत तो अच्छी लेकिन अंत बुरा होने का संकेत माना जाता है। यह बताता है कि साल में शुरुआती समय में लाभ मिलेगा लेकिन अंत में हानि की संभावना भी बनी रहेगी।



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