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एक व्यर्थ जीवन

उसने मन ही मन सोचा, "ये अब मेरे किसी काम के नहीं हैं, ये कुछ काम नहीं करते।" एक दिन पुत्र इस बात से इतना निराश हो गया कि उसने लकड़ी का एक ताबूत(शव पेटी) बनाया और उसे घसीटते हुए बरामदे तक ले गया और अपने पिता से उसके अंदर जाने के लिए कहा। पिता बिना कुछ बोले उसके अंदर चला गया।
ताबूत का ढक्कन बंद करने के बाद पुत्र उस ताबूत को खेत के उस किनारे पर ले गया जहाँ एक ऊँची चट्टान थी। जैसे ही वह उसे फेंकने वाला था वैसे ही उसे ताबूत के ढक्कन पर धीरे से खटखटाने की आवाज सुनाई दी। उसने उसे खोला। अभी भी शांत भाव से पड़े हुए पिता ने पुत्र की ओर देखा।
"मैं जानता हूँ कि तुम मुझे चट्टान से नीचे फेंकने वाले हो, परंतु तुम ऐसा करो इसके पहले क्या मैं तुम्हें एक सलाह दे सकता हूँ?" "वह क्या है", पुत्र ने पूछा दिया। पिता ने जवाब दिया, "यदि तुम चाहो तो मुझे चट्टान से फ़ेंक सकते हो, परंतु लकड़ी के इस ताबूत को संभाल कर रखो। तुम्हारे बच्चों को इसके उपयोग की आवश्यकता पड़ सकती है।"



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