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ऐसा होता तो बकरीद मे दी जाती बेटों की कुर्बानी, पढ़िए....
बकरीद मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। ये त्योहार भारत के अलावा कई मुस्लिमों देशों मे धूमधाम से मनाया जाता है। बकरीद को ईद-उल जुहा भी कहा जाता है। ईद के बाद मनाया जाने वाला ये त्योहार मुसलमानों के लिए आखरत से जुड़ा हुआ है।
इस त्योहार के लिए मुसलमानों को ईद से 70 दिनो तक इंतजार करना पड़ता है क्यूंकि बकरीद ईद के ठीक 70 दिनों के बाद मनाई जाती है। आपको बता दे कि इस दिन लोग बकरीद की नमाज अदा करते है और फिर जानवरों की कुरबानी करते हैं। क्या आप जानते मुस्लिम समुदाय के लोग बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी क्यूं देते है। इसके पीछे भी छिपी है एक कहानी आइए जानते हैं......

अल्लाह ने दिया था ये फरमान
वैसे तो इस्लाम धर्म में कई पैगंबर आए पर कुर्बानी का पूरा ये वाकया पैंगंबर इब्राहीम अलैस्सलाम से जुड़ा हुआ है, उनके जमाने से ही बकरीद का ये त्योहार मनाया जाता है। दरअसल इस्लाम के धर्मग्रथों के अनुसार इब्राहीम को एक ख्वाब आया जिसमें अल्लाह ने इब्राहीम से फरमाया की तू अपनी सबसे प्यारी चीज अल्लाह की राह पर कुर्बान कर दे। ये बात सुनकर इब्रहीम के आंखों मे आसू आ गए क्यूंकि 80 साल की उम्र में उनकी पहली औलाद इस्माइल अलैस्लाम के रूप में पैदा हुई थी, जो उनको सबसे ज्यादा प्यारी थी। आखिर उन्होने अल्लाह की राह में दिल पर पत्थर रखकर ये वचन दिया की वो अपने बेटे की कुर्बानी जरूर देगें।

बेटे ने पिता के आंखों मे बांधी काली पट्टी
मान्यता है कि जब इब्राहिम अलैस्साम इस्माइल की कुर्बानी देने जा रहे थे तब उनका पिता प्रेम उनके सामने आ रहा था जिससे वो अपने बेटे पर कुल्हाड़ी नहीं चला पा रहे थे। जब ये सब नजारा इस्माइल ने देखा तो अपने पिता से बोले की मुझे खुशी है कि मैं अल्लाह की राह में कुर्बान हो रहा हूं। आप मुझपर वार नहीं कर पा रहे है तो आप अपनी आंखों मे काली पट्टी बांध लीजिए इससे मै आपको नजर नहीं आऊंगा फिर आप आसानी से मुझे जिबा कर सकते है।

बेटे पर कुल्हाड़ी चलाते ही हुआ चमत्कार
बेटे की बाते सुनकर इब्राहीम फूटफूट कर रोने लगे और अपनी आंखो में काली पट्टी बांधकर अपने कलेजे के टुकड़े पर वार कर दिया। तभी आसमान से एक तेज बिजली के साथ एक चमत्कार हुआ। जब इब्राहीम ने आंखो से पट्टी हटाकर देखा तो उनके बेटे की जगह एक दुम्बा (जानवर) वहां कट गया था। अल्लाह को इब्राहीम का ये अकीदा इतना पसंद आया की उन्होने ये हुक्म दिया की जिस भी शख्स की इतनी हैसियत है कि वो कुर्बानी के जानवर खरीद सकता है उसके ऊपर आज से कुर्बानी वाजिब की जाती है।

कुर्बान करना ही है सच्चा धर्म
कथन है कि इस बात से अल्लाह पाक ने ये संदेश दिया कि सच्चा मुसलमान वही है जो अल्लाह की राह पर अपनी किसी भी चीज को कुर्बान कर दे। सच्ची अकीदत और अपने सच्चे मानने वालों के लिए ये त्योहार अल्लाह ने दिया है। उसके बाद तब से लेकर आज तक कुर्बानी का ये त्योहार अकीदतमंद मुसलमानों के द्वारा अपनी इमानदारी की कमाई से जानवर खरीद कर कुर्बान करके मनाया जाता है।



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