Latest Updates
-
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क -
बिना मारे चूहों को घर से भगाने का देसी तरीका! आटे में मिलाकर रख दें ये एक चीज, फिर कभी नहीं आएंगे नजर -
Pahadi Crispy Snack Singal Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और कुरकुरा स्वाद -
कौन हैं पंकज त्रिपाठी के भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी? आखिर क्यों हुआ जानलेवा हमला, गंभीर हालत में AIIMS में भर्ती -
Swapna Shastra: सपने में किन्नर को देखना होता है शुभ और अशुभ संकेत? जानिए इसका मतलब -
Cooling Summer Lunch Curd Rice Recipe: गर्मियों में पेट को ठंडक देने वाली सबसे आसान रेसिपी -
काले धब्बों वाले प्याज खाना चाहिए या नहीं? सेहत पर क्या होगा असर, यहां जानें इसका सही जवाब -
Ambubachi Mela 2026: कामाख्या मंदिर में शुरू हुआ अंबुबाची मेला, 3 दिनों तक बंद रहेंगे कपाट, जानें इसका महत्व -
Soft Dahi Paratha Recipe: घर पर बनाएं एकदम नरम और स्वादिष्ट दही का पराठा -
Aaj Ka Rashifal 22 June 2026: सोमवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग
ईद-उल-अजहा 2020: जामा मस्जिद के शाही इमाम के मुताबिक इस तारीख को मनाई जाएगी बकरीद
ईद उल अजहा (बकरीद) मुसलमानों के मुख्य त्योहारों में से एक है। ईद-अल-फितर यानी मीठी ईद मनाने के तकरीबन दो महीने बाद बकरीद मनायी जाती है। यह पर्व इस्लाम में बहुत महत्व रखता है। बकरीद को बड़ी ईद, बकरा ईद, ईद-उल-अजहा और ईद-उल-जुहा के नाम से भी जाना जाता है। बकरीद का यह पर्व कुर्बानी के दिन के तौर पर मनाया जाता है। इस्लाम में इस खास दिन पर अल्लाह के नाम पर कुर्बानी देने की रिवायत है।

बकरीद मनाने की तारीख
रमजान का पाक महीना खत्म होने के तकरीबन 70 दिनों बाद बकरीद मनाया जाता है। इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के बारहवें महीने जु-अल-हज्जा की पहली तारीख को चांद नजर आ जाता है, इसलिए इस महीने के दसवें दिन ईद-उल-अजहा का पर्व मनाने की परंपरा है।
वहीं जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी जानकारी दे चुके हैं कि इस साल ईद-उल-अजहा का पर्व 1 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा।

कैसे मनाया जाता है बकरीद का पर्व?
बकरीद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करके अल्लाह की इबादत करते हैं। इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है। इस मौके पर वो हजरत इब्राहिम की दी कुर्बानी को याद करते हैं। कुर्बानी के बाद बकरे के गोश्त के तीन हिस्से किये जाते हैं। एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा हिस्सा दोस्त तथा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए निकाला जाता है।

बकरीद के साथ जुड़ी प्रचलित कथा
पैगंबर हजरत इब्राहिम के साथ ही इस्लाम धर्म में कुर्बानी देने की परंपर शुरु हुई है। दरअसल प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक इब्राहिम अलैय सलाम को कोई संतान नहीं थी। अल्लाह से काफी मिन्नतों के बाद उन्हें एक संतान हुई और उसका नाम उन्होंने इस्माइल रखा। इब्राहिम अपने बेटे से बेहद प्यार करते थे। माना जाता है कि एक रात अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। उन्होंने एक-एक कर अपने सभी प्यारे जानवरों की कुर्बानी दे दी, लेकिन सपने में एक बार फिर अल्लाह से उन्हें अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने का आदेश मिला।
इब्राहिम को अपना बेटा सबसे ज्यादा प्यारा था। अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए वे अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देते समय अपने आंखों पर पट्टी बांध ली और कुर्बानी के बाद जब आंखे खोली तो उनका बेटा जीवित था। बताया जाता है कि अल्लाह इब्राहिम की निष्ठा से बेहद खुश हुए और उनके बेटे की जगह कुर्बानी को बकरे में बदल दिया। उसी समय से बकरीद पर कुर्बानी देने की यह रिवायत चली आ रही है।



Click it and Unblock the Notifications