पूरे साल किया जाता है सावन सोमवार का इंतजार, जानें इस दिन व्रत करने का लाभ

भोले बाबा की महिमा का बखान कर पाना असंभव है। भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए हर उपाय करने के लिए तैयार हैं। यही वजह है कि वो पूरे साल सावन महीने का इंतजार करते हैं। माना जाता है कि श्रावण माह भगवान शिव को बेहद प्रिय है और उनकी कृपा पाने के लिए भी ये मास उत्तम है। सृष्टि की बागडोर भगवान विष्णु संभालते हैं लेकिन देवशयनी एकादशी के बाद वो अगले चार महीने के लिए निद्रा अवस्था में चले जाते हैं। इस दौरान महादेव पालनकर्ता की भूमिका निभाते हैं। संसार की सारी जिम्मेदारी महादेव पर आ जाती है। सावन माह में आने वाले सोमवार की भी खास महत्ता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। भोलेनाथ के प्रिय सावन महीने के सोमवार की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। जानते सावन महीने के सोमवार का व्रत करने से जातक को क्या क्या लाभ मिलते हैं।

चंद्रमा की स्थिति होगी मजबूत

चंद्रमा की स्थिति होगी मजबूत

जो जातक अपनी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को बेहतर करना चाहते हैं, उन्हें सोमवार का व्रत करना चाहिय। इतना ही नहीं, ऐसा करने से कई रोगों से मुक्ति भी मिलती है।

रोजगार के अवसर

रोजगार के अवसर

कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होने से रोजगार मिलने में मदद मिलती है। वहीं व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी लाभ होता है।

कुंवारी लड़कियों के लिए फलदायी

कुंवारी लड़कियों के लिए फलदायी

ऐसा माना जाता है कि जो अविवाहित लड़कियां सोमवार का व्रत करती हैं उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। अच्छे जीवनसाथी की कामनापूर्ति के लिए लड़कियां सोलह सोमवार का व्रत करती हैं जिसकी शुरुआत वो सावन महीने से करती हैं।

जीवन-मृत्यु चक्र से मुक्ति

जीवन-मृत्यु चक्र से मुक्ति

पुराणों में ऐसा बताया गया है कि सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिलता है। व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और साथ ही वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।

समस्याओं से छुटकारा

समस्याओं से छुटकारा

भोले बाबा को प्रसन्न करना सबसे सरल माना जाता है। जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए सोमवार का व्रत करना विशेष फलदायी होता है।

सुखद वैवाहिक जीवन

सुखद वैवाहिक जीवन

सावन महीने के सोमवार की महत्ता बहुत अधिक है। जिन जातकों के वैवाहिक जीवन में अड़चन आ रही है तो उन्हें सोमवार का व्रत अवश्य करना चाहिए। पति और पति दोनों यह व्रत कर सकते हैं।

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