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जानिये नाग पंचमी की पूजा का महत्व
नाग पंचमी के दिन उपवास रख, पूजन करना कल्याणकारी कहा गया है। श्रवण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नाग पंचमी का पर्व प्रत्येक वर्ष श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। इस दिन के विषय में कई कथाएं प्रचलित है। जिनमें से कुछ कथाएं इस प्रकार है। इन में से किसी कथा का स्वयं पाठ या श्रवण करना शुभ रहता है। साथ ही विधि-विधान से नागों की पूजा भी करनी चाहिए।
नाग पंचमी का इतिहास : प्राचीन भारतीय संस्कृति में शिव ने साँप को अपने गले में रखकर और विष्णु ने शेष-शयन करके नाग के महत्व को दर्शाया है। देव-दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन में साधन रूप बनकर वासुकी नाग ने जनहित में बहुत बड़ा कार्य किया था। श्रीकृष्ण ने यमुना को कालिया नाग से मुक्त और शुद्ध किया था। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि नागों में अनंत (शेष नाग) हूँ। पुराणों अनुसार ऐसा विश्वास है कि हमारी धरती शेषनाग के फनों के ऊपर टिकी हुई है।

नाग पंचमी का उत्सव : पुराण में बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति पूरे वर्ष नाग की पूजा नहीं कर पता है तो उसे श्रावण कृष्ण एवं शुक्लपंचमी जिसे नाग पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन नागों की पूजा करनी चाहिए। सांपों की प्रसन्नता के लिए गाय के गोबर से दरवाजे पर सांप की आकृति बनाएं। इसके बाद दूध, दही, दूर्वा, पुष्प, अक्षत, कुश एवं गुग्गुल से नागों की पूजा करें। नाग पूजन के बाद पांच ब्राह्मणों को भोजन करना चाहिए। इस दिन खाने में नमक का प्रयोग नहीं करें।
नाग पंचमी की पूजा : देश के कुछ भागों में नाग पंचमी के दिन उपवासक अपने घर की दहलीज के दोनों ओर गोबर से पांच सिर वाले नाग की आकृ्ति बनाते है। इसके बाद नाग देवता को दूध, दुर्वा, कुशा, गन्ध, फूल, अक्षत, लड्डूओं सहित पूजा करके नाग स्त्रोत या निम्न मंत्र का जाप किया जाता है। नाग देवता को चंदन की सुगंध विशेष प्रिय होती है। इसलिये पूजा में चंदन का प्रयोग करना चाहिए। इस दिन की पूजा में सफेद कमल का प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त मंत्र का जाप करने से "कालसर्प योग' दोष की शान्ति भी होती है।



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