Latest Updates
-
छोटी हाइट वाली लड़कियों पर सबसे ज्यादा जंचते हैं ये आउटफिट, दिखती हैं सुपर स्टाइलिश और लंबी -
बरसात में इन 5 लोगों को गलती से भी नहीं खाना चाहिए दही, वरना बिगड़ सकती है सेहत -
Ravi Pradosh Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरा है रवि प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और शिव आरती -
World Paper Bag Day 2026: कब और क्यों हुई पेपर बैग दिवस की शुरुआत? जानें इसका दिलचस्प इतिहास -
गलती से भी पास-पास न रखें मनी प्लांट और तुलसी का पौधा, वरना कंगाली के साथ आ जाएंगी ये 3 बड़ी मुसीबतें -
इस एक श्राप की वजह से अविवाहित कपल्स नहीं कर सकते जगन्नाथ मंदिर में दर्शन, आप भी जान लें रहस्य -
Varalakshmi Vrat के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानें क्या करें, क्या न करें और सूतक के नियम -
क्या 1876 जैसी तबाही फिर होगी? 150 साल बाद लौट सकता है विनाशकारी अल नीनो! सूखा और अकाल का खतरा -
बरसात में भूलकर भी न खाएं ये 10 सब्जियां, वरना शरीर बन सकता है बीमारियों का घर -
अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कौन-सा तरीका है सबसे सुरक्षित? एक्सपर्ट से जानें पूरी जानकारी
Chanakya Niti: इंसान को अंदर से जलाकर राख कर देती हैं ये 6 चीजें
आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में व्यक्ति के व्यवहार एवं उसके परिवार और समाज के साथ संबंधों का विस्तार से वर्णन किया। वे अपने लिखे गये श्लोकों के माध्यम से समाज और परिवार की हकीकत को सामने रखते हैं और सुखमय जीवन के लिए कई सुझाव भी देते है। ऐसे ही एक श्लोक में आचार्य चाणक्य उन 6 परिस्थितियों के बारे में बताते हैं जिनके कारण व्यक्ति अंदर ही अंदर जल जाता है। यानि इन कष्टदायी स्थितियों में मनुष्य स्वयं में ही जल जाता है। कौन सी है वो परिस्थितयां जानते हैं विस्तार में -

चाणक्य द्वारा दिया गया श्लोक
कुग्रामवासः कुलहीन सेवा कुभोजन क्रोधमुखी च भार्या।
पुत्रश्च मूर्खो विधवा च कन्या विनाग्निमेते प्रदहन्ति कायम्॥

गलत लोगों से भरे गांव में रहना
आचार्य चाणक्य अपने इस श्लोक के माध्यम से बहुत महत्वपूर्ण सन्देश देते हैं। उनके अनुसार गलत गाँव (या जगह) में रहने से व्यक्ति कष्टों से घिरा रहता है। यानी गलत लोगों के संगत में रहने से या गलत लोगों से भरे गाँव में रहने से साधारण मनुष्य भी भीतर से जलने लगने लगता है। इसलिए ऐसे लोगों और जगह को छोड़ने में ही भलाई होती है।

कुलहीन व्यक्ति की सेवा करना
इसी प्रकार किसी कुलहीन व्यक्ति की सेवा करने से भी मनुष्य परेशान रहता है। चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति का कोई कुल ही ना हो उसकी सेवा करना धर्म के खिलाफ होता है। इसलिए जो व्यक्ति अच्छे कुल का ना हो उसकी सेवा करके खुद को कष्ट में नहीं डालना चाहिए।

खराब भोजन
चाणक्य के अनुसार ‘कुभोजन' यानि खराब भोजन भी व्यक्ति को भीतर से जलाता है। खराब भोजन व्यक्ति के स्वास्थ्य को बिगाड़ता है जिससे वह परेशानी महसूस करने लगता है।

अत्यधिक क्रोध करने वाली पत्नी
इसके साथ ही श्लोक में यह कहा गया है कि क्रोध प्रवृति की पत्नी भी मनुष्य को भीतर ही भीतर जलाती है। क्रोध करने वाली पत्नी घर-परिवार में अशांति और दुःख का करण बनती है जिस कारण व्यक्ति कभी भी सुख-चैन का अनुभव नहीं कर पाता और अंदर ही अंदर जलता रहता है।

मूर्ख पुत्र
श्लोक की दूसरी पंक्ति में चाणक्य कहते हैं कि यदि व्यक्ति का पुत्र मूर्ख है तो वह जीवन भर कष्ट में रहता है। एक मूर्ख पुत्र पूरे कुल का नाम बदनाम करता है और पिता की पीड़ा का कारण बनता है। अपने पुत्र की मुर्खता को देखकर व्यक्ति अंदर ही अंदर जलता है।

पुत्री का विधवा होना
संतान का सुख ही किसी भी व्यक्ति के लिए सर्वोपरि होता है। श्लोक के अंत में आचार्य कहते हैं कि अपनी पुत्री को विधवा रूप में देखना किसी भी पिता के लिए सबसे पीड़ा का क्षण होता है। यह परिस्थिति उस व्यक्ति को जीवन भर अंदर से जलाकर रखती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications