कौन है ये शालीग्राम? हर वर्ष देवउठनी एकादशी पर जिनके साथ तुलसी का विवाह होता है?

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Dev Uthni Ekadashi: देवउठनी एकादशी पर शालिग्राम पूजन का महत्व और लाभ | Shaligram Pooja | Boldsky

 कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। एकादशी में कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी, तुलसी ग्‍यारहस, आदि नामों से भी जाना जाता है।

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं और परम सती भगवती स्वरूपा मां तुलसी से उनका विवाह होता है तथा कार्तिक शुक्ल द्वादशी को श्री शालिग्राम और तुलसी का विवाह होता है।

हिंदू धर्म में तुलसी विवाह को बहुत महत्‍व दिया गया है, हर साल इस दिन तुलसी का शालीग्राम संग विवाह होता है, यह शालिग्राम, आखिर कौन है? और तुलसी विवाह इनके बिना क्‍यूं अधूरा माना जाता है, आइए जानते हैं?

भगवान नारायण के स्‍वयंभू अवतार है?

भगवान नारायण के स्‍वयंभू अवतार है?

भगवान शालिग्राम श्री नारायण का साक्षात् और स्वयंभू स्वरुप माने जाते हैं। आश्चर्य की बात है की त्रिदेव में से दो भगवान शिव और विष्णु दोनों ने ही जगत के कल्याण के लिए पार्थिव रूप धारण किया। जिस प्रकार नर्मदा नदी में निकलने वाले पत्थर नर्मदेश्वर या बाण लिंग साक्षात् शिव स्वरुप माने जाते हैं और स्वयंभू होने के कारण उनकी किसी प्रकार प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।

अंडाकार आकार में होते है

अंडाकार आकार में होते है

ठीक उसी प्रकार शालिग्राम भी नेपाल में गंडकी नदी के तल में पाए जाने वाले काले रंग के चिकने, अंडाकार पत्थर को कहते हैं। स्वयंभू होने के कारण इनकी भी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती और भक्त जन इन्हें घर अथवा मन्दिर में सीधे ही पूज सकते हैं।

शालिग्राम भिन्न भिन्न रूपों में प्राप्त होते हैं कुछ मात्र अंडाकार होते हैं तो कुछ में एक छिद्र होता है तथा पत्थर के अंदर शंख, चक्र, गदा या पद्म खुदे होते हैं। कुछ पत्थरों पर सफेद रंग की गोल धारियां चक्र के समान होती हैं। दुर्लभ रूप से कभी कभी पीताभ युक्त शालिग्राम भी प्राप्त होते हैं। जानकारों व् संकलन कर्ताओं ने इनके विभिन्न रूपों का अध्ययन कर इनकी संख्या 80 से लेकर 124 तक बताई है।

तुलसी बिना विवाह अधूरा

तुलसी बिना विवाह अधूरा

शालिग्राम को एक विलक्षण व मूल्यवान पत्थर माना गया है। क्योंकि मान्यता है कि शालिग्राम के भीतर अल्प मात्रा में स्वर्ण भी होता है। भगवान् शालिग्राम का पूजन तुलसी के बिना पूर्ण नहीं होता और तुलसी अर्पित करने पर वे तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं।

श्री शालिग्राम और भगवती स्वरूपा तुलसी का विवाह करने से सारे अभाव, कलह, पाप ,दुःख और रोग दूर हो जाते हैं।

मिलता है कन्‍यादान का पुण्‍य

मिलता है कन्‍यादान का पुण्‍य

तुलसी शालिग्राम विवाह करवाने से वही पुण्य फल प्राप्त होता है जो कन्यादान करने से मिलता है। जिन भक्‍तों की बेटियां नहीं होती है उन्‍हें तुलसी श‍ालिग्राम विवाह जरुर करवाना चाहिए। उन्‍हें भी कन्‍यादान का पुण्‍य मिलता है।

तीर्थो में श्रेष्‍ठ

तीर्थो में श्रेष्‍ठ

पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि जिस घर में भगवान शालिग्राम हो, वह घर समस्त तीर्थों से भी श्रेष्ठ है। इनके दर्शन व पूजन से समस्त भोगों का सुख मिलता है। भगवान शिव ने भी स्कंदपुराण के कार्तिक माहात्मय में भगवान शालिग्राम की स्तुति की है।

ब्रह्मवैवर्तपुराण के प्रकृतिखंड अध्याय में उल्लेख है कि जहां भगवान शालिग्राम की पूजा होती है वहां भगवान विष्णु के साथ भगवती लक्ष्मी भी निवास करती है।

पुराणों में यह भी लिखा है कि शालिग्राम शिला का जल जो अपने ऊपर छिड़कता है, वह समस्त यज्ञों और संपूर्ण तीर्थों में स्नान के समान फल पा लेता है।

जो निरंतर शालिग्राम शिला का जल से अभिषेक करता है, वह संपूर्ण दान के पुण्य तथा पृथ्वी की प्रदक्षिणा के उत्तम फल का अधिकारी बन जाता है।

वास्‍तुदोष बाधाएं खत्‍म

वास्‍तुदोष बाधाएं खत्‍म

मृत्युकाल में इनके चरणामृत का जलपान करने वाला समस्त पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक चला जाता है। जिस घर में शालिग्राम का नित्य पूजन होता है उसमें वास्तु दोष और बाधाएं खुद ही समाप्त हो जाती है।

पुराणों के अनुसार श्री शालिग्राम जी का तुलसीदल युक्त चरणामृत पीने से भयंकर से भयंकर विष का भी तुरंत नाश हो जाता है।

पूजन विधि

पूजन विधि

कहा जाता है कि घर में एक ही शालिग्राम का पत्‍थर होना चाहिए, शालिग्राम की पूजा का महत्‍व विष्‍णु की पूजा से ज्‍यादा माना गया है। शालीग्राम में चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्‍ता रखा जाता है। इसके अलावा शालीग्राम को नित्‍य पंचामृत से स्‍नान करवाया जाता है। जिस घर में शालीग्राम का पूजन होता है उस घर में हमेशा लक्ष्‍मीवास होता है।

तुलसी विवाह शालीग्राम के बिना अधूरी है, जितना महत्‍व तुलसी पूजन का है उतना ही शालीग्राम का भी है।

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English summary

DevUthni Ekadashi : Benefits of Salagram sila worship

Lord Vishnu awakens from sleep on the day of Dev uthani Ekadashi and on the day of Kartik Shukla Dwashashi, the marriage of Shree Shaligram and Tulsi happens.
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