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गणेश चतुर्थी पर रात को भूलकर भी न देखे चांद, वरना हो जाएगा कुछ बुरा..
गणपति बप्पा मोर्या... 25 अगस्त से अब हर घर, हर गली मौहल्ले में यही शब्द हर जगह गूंजेंगे। 25 अगस्त को इस बार गणेश उत्सव प्रारंभ होगा। बताया जा रहा है कि इस बार 58 साल बाद गणेश जी शनि मार्गीय में विराजेंगे। जिन राशियों पर शनि की कठोर दृष्टि चल रही है, उन सभी राशियों के लिए विशेष लाभ होगा। लेकिन गणेश चतुर्थी के दिन एक काम से बचना चाहिए, इस दिन रात को एक काम भूलकर भी न करना वरना इसका बुरा परिणाम हो सकता है।
गणेश चतुर्थी पर सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात यह है कि उस दिन कोई भी चाँद न देखें। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी पर चाँद देखने से झूठा चोरी का आरोप या या कलंक लगने का डर रहता है। वैसे तो सभी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चाँद देखने की मनाही है, लेकिन खास तौर पर भाद्र शुक्ल चतुर्थी को इसे देखना बिल्कुल वर्जित रहता है

वृश्चिक राशि पर
इस साल गणेश चतुर्थी से शनि सीधी चाल चलेंगे। इससे शनि का प्रकोप कम होगा। जो भक्त गणेश को अपने घर लाकर पूजा-अर्चना करेगा। उस पर वर्षभर गणेश की कृपा बनी रहेगी। न्यायाधिपति शनिदेव 25 अगस्त की शाम 5 बजकर 19 मिनट पर वृश्चिक राशि में मार्गी हो रहे हैं।

58 साल में बाद शानि मार्ग पर विराजेंगे गणेश जी
इस बार 58 साल बाद शनि की मार्गीय में गणेश जी विराजेंगे। शनि के मार्गीय होने से सभी राशियों में बेहतर प्रभाव देखने को मिलेगा। गणेश स्थापना के समय शनि के मार्गीय होने की शुभ घड़ी वर्ष 1959 में बनी थी। शनि के मार्गीय होने के दिन हस्त नक्षत्र में अमृत योग, रवि योग, शुभ योग एवं सूर्य, बुध दिव्य योग में गणेश जी की स्थापना होगी। गणेश जी की उपासना करने वालों से शनिदेव हमेशा प्रसन्न रहते हैं।

इस बार 11 वें दिन होगा विसर्जन
25 से पांच सितंबर तक गणेश उत्सव चलेगा। इस बार गणपति का 11वें दिन विसर्जन होगा। हस्त नक्षत्र में रवि योग, गज केसरी योग बनने से भक्तों के लिए यह विशेष फलदायी रहेगा। इस दिन गणेश की आराधना करने से छात्रों को विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होगी। गणेश जी सुख-शांति के देवता हैं।

शनि प्रकोप से मिलेगी मुक्ति
इस बार वृश्चिक में 141 दिन वक्रीय होने के बाद शनि देव 25 अगस्त से मार्गीय हो रहे हैं। जिसके कारण गणेश चतुर्थी से सभी राशि जातकों को शनि के प्रकोप से मुक्ति मिल जाएगी।



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