काम के साथ भोजन

By Purnima

flowers
ह्याकुजो जो एक अध्यात्मिक गुरू था, अस्सी वर्ष की उम्र में भी बड़ा परिश्रमी था। हालांकि बुढ़ापे का उस पर पूरा असर हो चुका था तब भी गुरू बगीचे की कांट छांट, मैदान की सफाई और पेड़ों की छंटाई का भारी काम करता था।

ह्याकुजो के विद्यार्थी गुरू के लिए बड़ा दुखी महसूस करते थे परंतु वे यह जानते थे कि वह उनके शब्दों पर ध्यान नहीं देगें। अत: उन्होंने गुरू के इस श्रम का अंत करने के लिए एक योजना बनाई।

उसका जीवन परिश्रम मुक्त करने के लिए उन्होंने उसके हथियार छुपा दिए। गुरू ने उस दिन खाना नहीं खाया और भोजन के लिए उसका यह संयम अगले तीन दिनों तक वैसे ही जारी रहा।

दहशत में घबराए छात्रों के पास उसके औज़ार उसी स्थान पर रखने के अलावा अन्य कोई उपाय नहीं था। ह्याकुजो ने फिर से काम शुरू कर दिया और उसी दिन अपना उपवास तोड़ दिया। गुरू ने उस दिन शाम को शिक्षा दी, "काम नहीं, भोजन नहीं "

Story first published: Wednesday, September 12, 2012, 13:47 [IST]
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