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कब और कैसे मनाया जाएगा गुड़ी पड़वा का पर्व?
गुड़ी पड़वा का त्योहार मुख्य तौर पर महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष के आगाज की खुशी में मनाया जाता है। ये पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है और इसी दिन से नए साल की शुरुआत मानी जाती है।

गौरतलब है कि पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण सभी 1 जनवरी को नववर्ष मनाने लगे हैं लेकिन हिंदू कैलेंडर के मुताबिक चैत्र माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नया साल शुरू होता है। ये त्योहार महाराष्ट्र के अलावा गोवा, आंध्र प्रदेश समेत दक्षिण भारतीय राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन ब्रम्हा ने सृष्टि की रचना की थी। इस दिन के साथ ही उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत भी हो जाती है।

गुड़ी पड़वा की तिथि और मुहूर्त
इस साल गुड़ी पड़वा का त्योहार 6 अप्रैल को चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा की तिथि को मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष की शुरुआत का जश्न मनाया जाएगा। भारतीय कैलेंडर में चैत्र को साल का प्रथम माह माना जाता है।
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ - 5 अप्रैल 2019 को 11.50 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त - 6 अप्रैल 2019 को 12.53 बजे

गुड़ी पड़वा से जुड़ी कथा
माना जाता है कि दक्षिण भारत में राजा बालि का राज था। भगवान श्री राम अपनी पत्नी सीता को खोजते हुए दक्षिण भारत पहुंचे और वहां उनकी भेंट बालि के भाई सुग्रीव से हुई। सुग्रीव ने श्री राम को बालि के अत्याचार, क्रूरता और कुशासन के बारे में जानकारी दी और उनकी मदद करने में अपनी असमर्थता दिखाई। श्री राम ने सुग्रीव की सहायता करने का फैसला किया और प्रजा को बालि के शासन से मुक्त कराया। ऐसी मान्यता है कि यह घटना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हुई थी। यही कारण है कि इस दिन लोग गुड़ी अर्थात विजय पताका फहराते हैं।
एक दूसरी कथा ये कहती है कि शालिवाहन ने कुम्हार के घर में मिट्टी से सेना बनाई और उनमें प्राण फूंके और उन सैनिकों की मदद से दुश्मनों को हराया। इस जीत के बाद से शालिवाहन शक की शुरुआत हुई। लोगों ने उनकी विजय का सम्मान करते हुए पताकाएं फहरायीं थीं।

ऐसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा
गुड़ी का मतलब पताका, ध्वज अथवा झंडा होता है और पड़वा यानी प्रतिपदा तिथि होती है। लोग घरों के आगे गुड़ी रखते हैं। घर के द्वार को आम के पत्तों से सजाते हैं। घर की साफ सफाई के बाद रंगोली तथा स्वस्तिक बनाई जाती है।

देशभर में अलग अलग नाम से मनाया जाता है इसका जश्न
गोवा और केरल राज्यों में रहने वाले कोंकणी समुदाय के लोग इसे संवत्सर पड़वो के नाम से मनाते हैं। कर्नाटक में ये त्योहार युगादी तो आंध्र प्रदेश में उगादी के नाम से मनाया जाता है। कश्मीर में रहने वाले हिंदू परिवार इसे नवरेह के नाम से पुकारते हैं। वहीं मणिपुर में ये दिन सजिबु नोंगमा पानबा या मेइतेई चेइराओबा के नाम से जाना जाता है। साथ ही उत्तर भारत में इस दिन के साथ ही चैत्र नवरात्रि शुरू हो जाते हैं।

पकवान भी होते हैं ख़ास
इस पर्व में बनाए जाने वाले व्यंजन स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी काफी अच्छे होते हैं। इस त्योहार के मौके पर आंध्र प्रदेश में पच्चड़ी बनाई जाती है। माना जाता है कि खाली पेट इसका सेवन करने से त्वचा से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। वहीं महाराष्ट्र में तैयार की जाने वाली पूरन पोली या पोरन पोली में इमली, गुड़, नीम का फूल और आम का इस्तेमाल किया जाता है और ये सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं।



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