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गणेश चतुर्थी: इको-फ्रेंडली गणेश उत्सव कैसे मनाएं

गणेश चतुर्थी का त्योहार 10 दिनों तक मनाया जाता है जिसमें विभिन्न रीतियां और परंपराएं पूरी की जाती हैं। त्योहार आने से कुछ महीनों पहले से ही इस पर्व की तैयारियां शुरु हो जाती हैं।
इस दौरान हिंदू धर्म के लोग कुछ रीतियों का पालन करते हैं जिनमें से एक है गणेश जी की मूर्ति की 10 दिनों तक अपने घर में स्थापना करना। दस दिनों के बाद इस मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाता है।
गणेश जी की मूर्ति को नदी या समुद्र में विसर्जित किया जाता है। साल दर साल ये परंपरा एक समस्या का रूप लेती जा रही है। मूर्ति के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली चीजों से पानी दूषित हो जाता है। इसलिए आपको गणेश चतुर्थी पर इको-फ्रेंडली मूर्तियों के इस्तेमाल के महत्व पर ध्यान देना चाहिए।
निम्न तरीके से आप इको-फ्रेंडली गणेश चतुर्थी मना सकते हैं और इस उत्सव के दौरान सजावट के लिए भी कुछ इको-फ्रेंडली टिप्स आजमा सकते हैं।

कौन-सी चीजें इस्तेमाल होती हैं
आमतौर पर मूर्ति निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस का इस्तेमाल किया जाता है। ये पानी में घुलने में बहुत समय लगाती हैं जिससे पानी दूषित हो जाता है। इन्हें पूरी तरह से पानी में घुलने में महीनों या सालों का समय लग सकता है। इको फ्रेंडली गणेश चतुर्थी के लिए आपको ऐसी मूर्तियां लेनी चाहिए जो मिट्टी से बनी हों और पानी में आसानी से घुल जाएं।

रिसाइक्लिंग
लकड़ी, पत्थर और धातु से बनी मूर्तियों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इन्हें पानी में विसर्जित करने के बजाय अपने घर में ही रखें और हर साल गणेश चतुर्थी के अवसर पर इनकी पूजा करें। आप अपने घर के पीछे बाल्टी में पानी भर कर भी विसर्जन की रीति पूर्ण कर सकते हैं।

पेंट और केमिकल
इको फ्रेंडली चतुर्थी से केमिकल और डाई के इस्तेमाल से भी बच सकते हैं। मूर्ति के पेंट में सीसा और पारा होता है जो कि पानी को दूषित कर सकता है। मूर्तियों के जहरीले और अन्य पेंट पानी की सतह पर एक परत बना देते हैं जिससे समुद्री जीवों में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है।

विर्सजन
ईको-फ्रेंडली गणेश चतुर्थी मनाने के लिए केवल मूर्ति को विसर्जित करें और इस उत्सव पर इस्तेमाल किए गए सजावट के सामान को पानी में ना बहाएं। मूर्ति को प्लास्टिक, नारियल, केले के पत्तों से सजाया जाता है। इन सभी को मूर्ति के साथ जल निकाय में विसर्जित किया जाता है। ऐसा ना किया जाए तो पानी को प्रदूषित होने से रोका जा सकता है।

सजावट
मिथक है कि गणेश जी की मूर्ति को जुलूस के माध्यम से पूरी सजावट के साथ लेकर जाना जरूरी है और फिर उसे जल निकाय में विसर्जित किया जाता है। आप पर्यावरण के अनुकूल गणेश चतुर्थी मनाने के लिए कागज या प्राकृतिक फूलों का उपयोग कर सकते हैं। मूर्ति पर चढ़ी माला और वस्त्र को पानी में प्रवाहित करने से बचाया जा सकता है।



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