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Kamada Ekadashi 2022 : कामदा एकादशी : संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें व्रत और पूजा
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी होती है। एकादशी पर भगवान विष्णु, श्री कृष्ण और उनके अवतारों की पूजा की जाती है। हिंदू नव वर्ष की पहली एकादशी यानी कामदा एकादशी को सबसे बड़ी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक कथाओं में इस बात का उल्लेख किया गया है कि इस दिन विष्णु जी की पूजा करने और व्रत रखने से संतान की इच्छा रखने वाले लोगों की मनोकामना पूरी होती है और देवी लक्ष्मी की भी कृपा बरसती है।
हर महीने में कुल दो एकादशी होती है शुक्ल और कृष्ण एकादशी। चैत्र मास की इस एकादशी का अपना एक अलग ही महत्व होता है। आइए विस्तार से जानते हैं।

2022 में कब है कामदा एकादशी?
इस बार कामदा एकादशी का महान पर्व 12 अप्रैल, मंगलवार को है। भक्त मंगलवार को ही व्रत रखेंगे और पूजा करेंगे।

कामदा एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त
चैत्र शुक्ल एकादशी तिथि की शुरूआत 12 अप्रैल 2022, मंगलवार प्रातः 04.30 बजे से होगी जो 13 अप्रैल को सुबह 5:02 मिनट पर खत्म हो जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त 11:57 से लेकर दोपहर 12:48 तक है।

कैसे करें कामदा एकादशी पर पूजा?
सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा की तैयारियां शुरू कर दें। लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर विष्णु जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद भगवान का अभिषेक करें। इसके लिए एक लौटे में जल, तिल, अक्षत और रोली डाल लें। प्रसाद में फलों के अलावा आप पंचामृत और आटे का चूरण जरूर बना लें। फिर भगवान को फूल चढ़ाएं, धूप जलाएं और देसी घी का दीपक भी जलाएं। इसके बाद एकादशी का पाठ करें। कुछ लोग एकादशी पर रात्रि जागरण भी करते हैं। पूजा खत्म होने के बाद विष्णु जी की आरती भी करें।

संतान गोपाल मंत्र का जाप
जो भक्त संतान के इच्छुक है, कामदा एकादशी पर उन्हें श्री कृष्ण को पीले फल के साथ पीले फूल अर्पित करने चाहिए। बाद में चढ़ाए हुए फल को पति पत्नी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। इसके अलावा पति और पत्नी को साथ में संतान गोपाल मंत्र का जाप करना चाहिए। जो लोग भगवान के आगे सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं उन्हें मनचाहा परिणाम जरूर मिलता है।

कामदा एकादशी व्रत और पूजा का महत्व
ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति पूरे विधि विधान से कामदा एकादशी के दिन पूजा और व्रत करता है उस पर ईश्वर कि कृपार बरसती है। उस व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही उसका जीवन सुखों से भरा रहता है। कामदा एकादशी करने वाले लोग हमेशा निरोगी रहते हैं। इतना ही नहीं इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की जाती है।

दान-दक्षिणा देना होता है शुभ
कामदा एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को खाना खिलाना और अपनी क्षमता अनुसार दक्षिणा देना बेहद शुभ माना जाता है। इसके इस दिन अलावा गरीबों को भी भोजन कराना चाहिए, साथ ही उन्हें वस्त्र आदि भी दान किया जाता है।



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