Latest Updates
-
Today Bank Holiday: क्या आज बंद रहेंगे बैंक, स्कूल और शेयर बाजार; जानें आपके शहर का क्या है हाल -
Mahavir Jayanti 2026 Wishes:अहिंसा का दीप जलाएं…इन संदेशों के साथ अपनों को दें महावीर जयंती की शुभकामनाएं -
Mahavir Jayanti Quotes 2026: 'जियो और जीने दो', महावीर जयंती पर अपनों को शेयर करें उनके अनमोल विचार -
Aaj Ka Rashifal 31 March 2026: मार्च के आखिरी दिन इन 4 राशियों का खुलेगा भाग्य, जानें आज का भविष्यफल -
Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती कब है? जानें तिथि, महत्व और भगवान महावीर के प्रमुख सिद्धांत -
कौन थे राहुल अरुणोदय बनर्जी? शूटिंग के दौरान डूबने से हुई मौत, 43 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा -
बिग बॉस फेम रजत दलाल ने रचाई गुपचुप शादी, फोटोज पोस्ट करके सबको किया हैरान, जानें कौन है दुल्हन? -
Vastu Tips: घर में आर्थिक संकट आने से पहले दिखते हैं ये संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज -
40 की उम्र में दूसरी बार मां बनीं सोनम कपूर, सोशल मीडिया पर दी खुशखबरी, जानिए बेटा हुआ या बेटी -
घर में छिपकलियों ने मचा रखा है आतंक? भगाने के लिए आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, फिर कभी नहीं दिखेंगी दोबारा
भगवान भोलेनाथ और माता सती से संबंधित है लोहड़ी पर्व, जानें कथा
भारत में लोहड़ी प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर साल यह मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। वैसे तो लोहड़ी का त्योहार हरियाण और पंजाब के मुख्य पर्वों में से एक है, मगर अब यह देश और दुनिया के दूसरे कई हिस्सों में भी बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। शरद ऋतु के समापन के समय में लोहड़ी का पर्व पड़ता है।
लोहड़ी का त्योहार खेती-किसानी से जुड़ा पर्व है। लोहड़ी के समय में किसान अपनी नई फसल की खुशियां मनाते हैं और भगवान का धन्यवाद करते हैं। आज जानते हैं लोहड़ी पर्व के साथ जुड़ी हुई कथा के बारे में।

लोहड़ी की तिथि
साल 2022 में लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। लोहड़ी को कई इलाकों में लाल लोई के नाम से भी जाना जाता है।

कैसे मनाई जाती है लोहड़ी
लोहड़ी के दिन सभी परिवार, पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार करीब आ जाते हैं और सब साथ में मिलकर जश्न मनाते हैं। इस दिन बच्चों की टोलियां घर घर जाती हैं और वे सबको लोकगीत सुनाते हैं। इसके बदले में हर घर से बच्चों को पैसे या तरह तरह के मिष्ठान दिए जाते हैं। बच्चों को खाली हाथ नहीं लौटाया जाता है इसलिए उन्हें मूंगफली, गजक, रेवड़ियां, मक्का, गुड़ आदि दी जाती हैं।
शाम के समय में सभी लोग एकत्र होते हैं और आग जलाते हैं। इसके चारों ओर चक्कर लगाकर अग्नि को मूंगफली, मक्के, रेवड़ियों की भेंट चढ़ाई जाती है। साथ ही सभी मिलकर नाचना-गाना भी करते हैं।

लोहड़ी पर्व के साथ जुड़ी मान्यता
लोहड़ी पर्व के साथ कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। एक प्रचलित पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति भगवान भोलेनाथ का तिरस्कार किया था। राजा ने अपने दामाद को यज्ञ में शामिल नहीं किया और न ही उन्हें निमंत्रण भेजा गया। इस बात से माता सती बहुत आहत हुईं। उन्होंने अपने पति के अपमान से नाराज होकर अग्निकुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ऐसा कहा जाता है कि तब से ही प्रायश्चित के रूप में लोहड़ी मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन विवाहित बेटियों को घर बुलाया जाता है और अपने सामर्थ्य के अनुसार उनका सम्मान किया जाता है। भेंट स्वरूप उन्हें श्रृंगार का सामान और कई उपहार भी दिए जाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications











