Latest Updates
-
World Paper Bag Day 2026: कब और क्यों हुई पेपर बैग दिवस की शुरुआत? जानें इसका दिलचस्प इतिहास -
गलती से भी पास-पास न रखें मनी प्लांट और तुलसी का पौधा, वरना कंगाली के साथ आ जाएंगी ये 3 बड़ी मुसीबतें -
इस एक श्राप की वजह से अविवाहित कपल्स नहीं कर सकते जगन्नाथ मंदिर में दर्शन, आप भी जान लें रहस्य -
Varalakshmi Vrat के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानें क्या करें, क्या न करें और सूतक के नियम -
क्या 1876 जैसी तबाही फिर होगी? 150 साल बाद लौट सकता है विनाशकारी अल नीनो! सूखा और अकाल का खतरा -
बरसात में भूलकर भी न खाएं ये 10 सब्जियां, वरना शरीर बन सकता है बीमारियों का घर -
अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कौन-सा तरीका है सबसे सुरक्षित? एक्सपर्ट से जानें पूरी जानकारी -
World Population Day 2026 Quotes: 'आबादी पर लगाम, तरक्की को सलाम', इन कोट्स व स्लोगन से फैलाएं जागरूकता -
अमिताभ बच्चन बने पॉलिसीबाजार के ब्रांड एंबेसडर, शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा इंश्योरेंस जागरुकता अभियान -
बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी ये दवाएं, अल्कोहल की मात्रा को लेकर सरकार ने लागू किया कड़ा नियम
भगवान भोलेनाथ और माता सती से संबंधित है लोहड़ी पर्व, जानें कथा
भारत में लोहड़ी प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर साल यह मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। वैसे तो लोहड़ी का त्योहार हरियाण और पंजाब के मुख्य पर्वों में से एक है, मगर अब यह देश और दुनिया के दूसरे कई हिस्सों में भी बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। शरद ऋतु के समापन के समय में लोहड़ी का पर्व पड़ता है।
लोहड़ी का त्योहार खेती-किसानी से जुड़ा पर्व है। लोहड़ी के समय में किसान अपनी नई फसल की खुशियां मनाते हैं और भगवान का धन्यवाद करते हैं। आज जानते हैं लोहड़ी पर्व के साथ जुड़ी हुई कथा के बारे में।

लोहड़ी की तिथि
साल 2022 में लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। लोहड़ी को कई इलाकों में लाल लोई के नाम से भी जाना जाता है।

कैसे मनाई जाती है लोहड़ी
लोहड़ी के दिन सभी परिवार, पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार करीब आ जाते हैं और सब साथ में मिलकर जश्न मनाते हैं। इस दिन बच्चों की टोलियां घर घर जाती हैं और वे सबको लोकगीत सुनाते हैं। इसके बदले में हर घर से बच्चों को पैसे या तरह तरह के मिष्ठान दिए जाते हैं। बच्चों को खाली हाथ नहीं लौटाया जाता है इसलिए उन्हें मूंगफली, गजक, रेवड़ियां, मक्का, गुड़ आदि दी जाती हैं।
शाम के समय में सभी लोग एकत्र होते हैं और आग जलाते हैं। इसके चारों ओर चक्कर लगाकर अग्नि को मूंगफली, मक्के, रेवड़ियों की भेंट चढ़ाई जाती है। साथ ही सभी मिलकर नाचना-गाना भी करते हैं।

लोहड़ी पर्व के साथ जुड़ी मान्यता
लोहड़ी पर्व के साथ कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। एक प्रचलित पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति भगवान भोलेनाथ का तिरस्कार किया था। राजा ने अपने दामाद को यज्ञ में शामिल नहीं किया और न ही उन्हें निमंत्रण भेजा गया। इस बात से माता सती बहुत आहत हुईं। उन्होंने अपने पति के अपमान से नाराज होकर अग्निकुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ऐसा कहा जाता है कि तब से ही प्रायश्चित के रूप में लोहड़ी मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन विवाहित बेटियों को घर बुलाया जाता है और अपने सामर्थ्य के अनुसार उनका सम्मान किया जाता है। भेंट स्वरूप उन्हें श्रृंगार का सामान और कई उपहार भी दिए जाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications