जानें शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का तरीका और इससे जुड़े जरूरी नियम

महादेव को सच्चे मन से एक लोटा जल चढ़ाकर भी प्रसन्न किया जा सकता है। मगर जब बात उनके प्रिय वास्तु की आती है तो उसमें बेलपत्र को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। कुछ लोगों के अनुसार तीन पत्तों वाला बेलपत्र त्रिदेव का प्रतिनिधित्व करते हैं तो कई इसे भगवान शिव के त्रिशूल का प्रतीक मानते हैं। माना जाता है कि बेलपत्र चढ़ाने से जीवन में कष्टों से छुटकारा मिल जाता है।

भगवान भोलेनाथ बहुत जल्दी अपने भक्तों से खुश हो जाते हैं, मगर किसी गलती पर उन्हें क्रोधित होते देर नहीं लगती है। शिवजी की पूजा के समय छोटी छोटी गलतियों से बचना चाहिए। इस लेख के माध्यम से जानते हैं शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से जुड़े कौन से नियम हैं और इसका सही तरीका क्या है।

शिवलिंग पर कैसा बेलपत्र चढ़ाएं

शिवलिंग पर कैसा बेलपत्र चढ़ाएं

भगवान शिव की शीघ्र कृपा पाने के लिए पांच पत्तों वाला बेलपत्र चढ़ाना शुभ होता है, मगर यह जल्दी मिलता नहीं है। आप तीन पत्तों वाला बेलपत्र चढ़ाकर शिवजी का आशीर्वाद पाएं।

इस दिन बेलपत्र न तोड़े

इस दिन बेलपत्र न तोड़े

शिव पुराण में बेलपत्र से जुड़ी जानकारी दी गयी है। इसके अनुसार शिवजी को समर्पित दिन पर बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को बेलपत्र न तोड़ें। संक्रांति के समय और सोमवार को भी बेलपत्र तोड़ना वर्जित है। आप पूजा से एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़कर रख लें।

ऐसा बेलपत्र न चढ़ाएं

ऐसा बेलपत्र न चढ़ाएं

बेलपत्र का चुनाव करते समय ये जरूर देखें कि उसमें किसी भी तरह का दाग-धब्बा न हो और न ही वो कहीं से कटा-फटा हो। इस तरह के बेलपत्र बिल्कुल भी न चढ़ाएं।

शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाएं

शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाएं

आप अपनी इच्छानुसार शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ा सकते हैं। वैसे शिवजी को 3 से लेकर 11 बेलपत्र चढ़ाना शुभ व फलदायी माना जाता है।

बेलपत्र चढ़ाने का तरीका

बेलपत्र चढ़ाने का तरीका

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का भी विशेष तरीका है। बेलपत्र को हमेशा अनामिका,अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से मध्य वाली पत्ती को पकड़कर शिवलिंग पर अर्पित करें। बेलपत्र को हमेशा उलटकर चिकनी सतह को शिवलिंग पर रखें।

बेलपत्र कभी भी अशुद्ध नहीं होता है। यदि आपको नया बेलपत्र नहीं मिल रहा हो तो आप चढ़ाये हुए बेलपत्र को धोकर दोबारा शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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