Latest Updates
-
Cooling Summer Lunch Curd Rice Recipe: गर्मियों में पेट को ठंडक देने वाली सबसे आसान रेसिपी -
काले धब्बों वाले प्याज खाना चाहिए या नहीं? सेहत पर क्या होगा असर, यहां जानें इसका सही जवाब -
Ambubachi Mela 2026: कामाख्या मंदिर में शुरू हुआ अंबुबाची मेला, 3 दिनों तक बंद रहेंगे कपाट, जानें इसका महत्व -
Soft Dahi Paratha Recipe: घर पर बनाएं एकदम नरम और स्वादिष्ट दही का पराठा -
Aaj Ka Rashifal 22 June 2026: सोमवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग -
Quick Filling Dinner Anda Paratha Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसा स्वादिष्ट अंडा पराठा -
मानसून से पहले दिल्ली में डेंगू के 162 और मलेरिया के 42 मामले, कहीं आप भी न हो जाएं शिकार; जानें बचाव के उपाय -
Dhaba Style Marinade Chicken Tikka Recipe: घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा स्मोकी स्वाद -
प्रेग्नेंट हैं 39 साल की सामंथा रुथ प्रभु! करीबी शख्स ने किया कन्फर्म, जानें कब होगी डिलीवरी -
मलाइका अरोड़ा की फिटनेस का खुल गया राज, 52 की उम्र में यंग दिखने के लिए करती हैं ये 5 योगासन
Mangla Gauri Vrat 2022 Dates: सौभाग्य और संतान सुख के लिए ऐसे करें देवी मंगला गौरी की पूजा
सावन का महीना भोलेनाथ के साथ माता पार्वती को भी समर्पित होता है। सावन के सोमवार को शिव जी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। वहीं हर मंगलवार को देवी पार्वती के स्वरूप माता मंगला गौरी की पूजा की जाती है। यानी सावन के सोमवार के अलावा मंगलवार भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि मंगला गौरी देवी की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है , साथ ही संतान सुख की भी प्राप्ति होती है।
चलिए जानते हैं इस पूजा की विधि, कथा और महत्व के बारे में।

2022 में पड़ेंगे 4 मंगलवार
इस साल सावन के महीने में कुल 4 मंगलवार पड़ने वाले हैं। पहला मंगलवार 19 जुलाई को है, दूसरा 26 जुलाई, तीसरा 2 अगस्त को और चौथा मंगलवार 9 अगस्त को है। चार मंगलवार पड़ना बहुत ही शुभ संयोग माना जा रहा है क्योंकि इसकी शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग से हो रही है।

इस विधि से करें पूजा
मंगला गौरी देवी की पूजा करने के लिए आप सुबह स्नान करने के बाद साफ सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा के स्थान पर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछा लें। अब माता पार्वती के साथ गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। देवी मां को 16 श्रृंगार की सारी चीजें चढ़ाएं। भोग में आप सूखा मेवा, मिठाई, फल, लौंग, इलायची आदि चढ़ा सकती हैं। मंगला गौरी की कथा सुनने के बाद आरती करें। फिर प्रसाद लोगों में बांट दें।

मंगला गौरी व्रत कथा
धर्मपाल नाम का एक व्यापारी था जो बहुत ही धनवान था। उसकी पत्नी बेहद सुंदर थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी जिसकी वजह से वे हमेशा दुखी रहते थे। काफी पूजा पाठ और मन्नतों के बाद उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन उनका बेटा अल्पआयु था। कहते हैं उसे श्राप मिला था कि 16 वर्ष की आयु में सांप के काटने से उसकी मृत्यु हो जाएगी। धर्मपाल के पुत्र की 16 वर्ष की आयु से पहले ही शादी हो गई। उसकी शादी एक ऐसी कन्या से हुई जिसकी माता देवी मंगला गौरी की बहुत बड़ी भक्त थी। उसने सच्चे मन से माता की पूजा करके वरदान पाया था कि उसकी पुत्री कभी विधवा नहीं होगी। इस वरदान की वजह से धर्मपाल के पुत्र की आयु लंबी हो गई। तब से महिलाएं सौभाग्य और संतान सुख के लिए देवी मंगला गौरी की पूजा करती हैं और व्रत भी रखती हैं।
मंगला गौरी व्रत उद्यापन
सुहागिन औरतों के लिए यह व्रत बहुत ही खास होता है। 16 या 20 मंगलवार पूरे होने पर महिलाएं उद्यापन करती हैं। कहते हैं इस व्रत का उद्यापन करना बेहद जरूरी है। बिना उद्यापन मनचाहे फल की प्राप्ति नहीं होती है।
उद्यापन की सही विधि
उद्यापन के दिन महिलाएं व्रत रखें और पूरा श्रृंगार करें। इसके अलावा पति के साथ गांठ जोड़कर पूजा में बैठे। लकड़ी की चौकी के चारों ओर केले के पत्ते बांधे और यथाविधि कलश की स्थापना करें। कलश के ऊपर देवी मंगलागौरी की स्वर्णमूर्ति रखें। माता को सुहाग की चीजें जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि चढ़ाएं। आप देवी को वस्त्र भी चढ़ा सकती हैं। इसके बाद गणेश जी का स्मरण करें और पूरे 16 दीपक जलाएं। अब आप अपने पति और परिवार के साथ हवन करें। पूरे 16 दीपकों से आरती करें। इसके बाद आप 16 या 21 ब्राह्मणों को भोज कराएं और उन्हें दान दें। इसके अलावा आप सुहागिन औरतों को भी भोजन कराएं। उन्हें सुहाग की पिटारी, वस्त्र आदि दें। अंत में अपने बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूर लें।



Click it and Unblock the Notifications