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किन्नर समाज के लोग इस देवी की करते हैं पूजा, जानें कहा है मंदिर

इस दुनिया में महिला और पुरुष के अलावा एक समाज और रहता है, जिसे हम सभी किन्नर समाज के रूप में जानते हैं। किन्नर समाज महिलाओं और पुरुष से काफी अलग होते हैं। आज के समय में भी इन किन्नरों की लाइफस्टाइल आम लोगों से काफी अलग होती है। इनके जीवन से जुड़ी कई बातें तो हम लोग जानते ही नहीं हैं। इनके रीति-रिवाज, देवी-देवता, पूजा पाठ का तरीका, सब कुछ हमसे काफी यूनिक है। इनके लाइफस्टाइल के बारे में लोगों तक ज्यादा से ज्यादा जानकारी पहुंचाने के लिए कई किताबे भी लिखी गई हैं, और कई फिल्में भी बनाई गई हैं। लेकिन क्या कभी आप ये जान पाए हैं, कि आखिर किन्नर समाज के लोग किस देवी या देवता की पूजा करते हैं। इनके देवी-देवता कौन हैं। अगर नहीं तो आइए जानते हैं, किन्नर समाज के देवी-देवताओं के बारे में और कहां स्थापित है इनका मंदिर...
किन्नर समाज किस देवी की करते हैं पूजा?
किन्नर समाज में बहुचरा देवी कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है। मुर्ग वाली माता के नाम से भी जाने जानी वाली देवी को किन्नर समाज अर्धनारीश्वर के रूप में भी पूजती हैं। आपको इन देवी का मंदिर भारत के कई स्थानों पर मिल जाएगा। लेकिन देवी का सबसे मशहूर मंदिर गुजरात के मेहसाणा में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण वडोदरा के राजा मानाजीराव गायकवाड़ ने करवाया था। जहां देवी बहुचरा मुर्ग पर विराजमाम रहती हैं।
कैसे बनी देवी बहुचरा किन्नरों की कुलदेवी?
नि:संतान दंपत्ति संतान पाने के लिए मां बहुचरा की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता हैं कि गुजरात में एक बार एक राजा ने संतान पाने के लिए देवी बहुचरा से वरदान मांगा। राजा की भक्ति से खुश होकर देवी ने उन्हें संतान प्रप्ति का वरदान तो दिया, लेकिन उनका बेटा नपुंसक निकला। जिसके बाद एक दिन बहुचरा देवी राजा के बेटे के सपने में आई और उसे गुप्तांग समर्पित कर मुक्ति के मार्ग पर चलने को कहा। राजा के बेटे ने देवी की बात मानी और उनका उपासक बन गया। जिसके बाद से सभी किन्नर समाज ने देवी बहुचरा को अपनी कुलदेवी मानकर उनकी उपासना शुरू कर दी।
किन्नर समाज की उत्पत्ति
किन्नर समाज को लेकर ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम जब अयोध्या छोड़कर 14 साल के वनवास के लिए जा रहे थे, तभी उनकी प्रजा और किन्नर समाज के लोग उनके पीछे-पीछे अयोध्या छोड़कर जाने लगे। जिसके बाद भगवान राम ने उन्हे वापस अयोध्या जाने की सलाह देते हुए अपने वनवास पर चले गए। लेकिन जब अपना वनवास पूरा करके भगवान राम वापस अयोध्या लौटे, तो पाया किन्नर समाज वहीं भगवान राम का इंतजार कर रहे थे। किन्नर समाज की भक्ति से खुश होकर भगवान राम ने किन्नरों को वरदान दिया कि उनका दिल से दिया आशीर्वाद हमेशा फलित होगा।
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