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Pitru Paksha Shradh Rules: पितृ पक्ष में लोहे के बर्तन के उपयोग से बचें, जानें और किन कामों की है मनाही
पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के साथ होता है और इसका समापन आश्विन महीने की अमावस्या तिथि को होता है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की बहुत अधिक महत्ता है। यह पूर्वजों के प्रति संतान की आस्था व उनके प्रति सम्मान को दर्शाता है। श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों का स्मरण किया जाता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए तर्पण कार्य किया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान आपके कुछ कार्य पितरों को नाराज भी कर सकते हैं। उन गलतियों से बचने के लिए जरुर जानें पितृ पक्ष के दौरान किन कामों की मनाही है।

न करें लोहे के बर्तन का इस्तेमाल
पितृ पक्ष के समय श्राद्ध कर्म के दौरान लोहे के बर्तन का इस्तेमाल करने की मनाही होती है। माना जाता है कि इस अवधि में लोहे के बर्तन का प्रयोग करने से घर-परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आप इसके स्थान पर तांबा, पीतल या किसी दूसरे धातु से बने बर्तन प्रयोग में लाएं।

तेल का इस्तेमाल बंद
पितृ पक्ष में तेल के उपयोग पर पाबंदी होती है। इस दौरान दूसरों के घर में बना खाना भी नहीं खाना चाहिए। इस अवधि में पान का सेवन भी न करें। भोजन में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल करने से बचें।

शुभ कार्य पर रोक
श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। नई चीजों की खरीदारी पर भी रोक होती है। ये समय पूर्वजों को स्मरण करने और उनकी आत्मा की शांति की कामना के लिए उपयोग किया जाता है।

नहीं काटते हैं केस
पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने वाले जातक को दाढ़ी व बाल काटने की मनाही होती है। माना जाता है कि ऐसा करने वाले व्यक्ति को जीवन में आर्थिक हानि झेलनी पड़ती है।
पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के साथ होता है और इसका समापन आश्विन महीने की अमावस्या तिथि को होता है। इस साल पितृपक्ष 6 अक्टूबर को खत्म होगा।



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