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जुलाई महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 तारीख को पड़ रही है, यानी इस दिन भक्त संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखेंगे। यह पूजा भगवान गणेश को समर्पित है। हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जी की पूजा की जाती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं,वहीं कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार जो भी व्यक्ति चतुर्थी तिथि पर व्रत और पूजन करता है, विघ्नहर्ता श्री गणेश उसके जीवन के सभी कष्ट दूर करते हैं।
चलिए आपको इस महान पूजा और व्रत से जुड़ी सारी महत्वपूर्ण जानकारियां देते हैं।

चतुर्थी तिथि का आरंभ
हिंदू पंचाग के अनुसार चतुर्थी तिथि की शुरुआत 16 जुलाई, शनिवार को दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से हो जाएगी। रविवार 17 जुलाई को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर चतुर्थी तिथि समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत रविवार को ही रखा जाएगा।
ऐसे होते हैं गणेश जी प्रसन्न
प्रथम पूजनीय श्री गणेश को मोदक और लड्डू बेहद प्रिय है। चतुर्थी के दिन भगवान को इसका भोग जरूर लगाएं। इसके अलावा आप गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना न भूलें।

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के बीच चौपड़ खेल की प्रतियोगिता हो रही थी जिसमें निर्णायक के रूप में भगवान ने मिट्टी की एक प्रतिमा बनाई और उसमें जान डाल दी। बाद में उस बालक ने माता पार्वती को पराजित घोषित कर दिया जिससे नाराज होकर देवी ने उस बालक को श्राप दे दिया की वह पैर से विकलांग हो जाए। उस बालक के क्षमा मांगने के बाद माता ने अपना श्राप तो वापस नहीं लिया, लेकिन उसे गणेश जी की पूजा करने के लिए कहा। गणेश जी की पूजा करने से वह बालक एकदम ठीक हो गया।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
ऐसी मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी पर व्रत और पूजन करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, साथ ही उसका मानसिक कष्ट भी दूर होता है।



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