Latest Updates
-
Hanuman Jayanti 2026 Wishes: अंजनी के लाल तू...इन भक्तिमय संदेशों से अपनों को दें हनुमान जयंती की शुभकामनाएं -
Hanuman Jayanti Sanskrit Wishes: 'ॐ हनुमते नमः', इन श्लोकों व संदेशों से दें हनुमान जयंती की बधाई -
Aaj Ka Rashifal, 2 April 2026: मेष से मीन तक, जानें हनुमान जयंती पर सभी 12 राशियों का राशिफल -
Hanuman Jayanti 2026 Upay: हनुमान जयंती पर बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय, हर मनोकामना होगी पूरी -
Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती पर मंगल गोचर का शुभ संयोग, वृषभ सहित इन 5 राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम -
Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जी के इन 12 चमत्कारी नामों के जाप से मिलेंगे अनगिनत लाभ, हर कष्ट से मिलेगी मुक्ति -
Chaitra Purnima 2026: चैत्र पूर्णिमा कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Odisha Day 2026 Wishes: उत्कल दिवस...ओडिशा स्थापना दिवस के मौके पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
April Fool's Day 2026 Shayari: अप्रैल फूल डे पर दोस्तों-यारों को भेजें ये फनी शायरियां, रोक नहीं पाएंगे हंसी -
April Fool's Day 2026 Wishes: मूर्खों के सरताज...अप्रैल फूल पर दोस्तों-रिश्तेदारों को भेजें ये फनी मैसेज
Sheetla Saptami 2023: बच्चों के स्वस्थ जीवन के लिए महिलाएं रखती हैं शीतला सप्तमी व्रत, नोट कर लें तिथि

हिन्दू धर्म में माता शीतला का ख़ास महत्व है। शीतला माता को समर्पित ख़ास त्यौहार शीतला सप्तमी के दिन पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत का पालन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और संतान के सुखी जीवन की कामना भी पूरी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता के हाथों के कलश में सभी 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है। दक्षिण भारत में शीतला माता को देवी मरिअम्मन या देवी पोलेरम्मा के रूप में जाना जाता है। फाल्गुन माह में होली के सातवें दिन शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। चलिए जानते हैं इस पर्व की तिथि, महत्व, पूजन विधि एवं अन्य ख़ास बातें।

शीतला सप्तमी 2023 तिथि एवं मुहूर्त
इस साल शीतला सप्तमी की शुरुआत 13 मार्च को रात 09:27 बजे से होगी और समापन 14 मार्च को 09:27 बजे होगा। उदया तिथि को मानते हुए शीतला सप्तमी 14 मार्च को मनाई जाएगी। अगले दिन यानी 15 मार्च को शीतला अष्टमी भी मनाई जाती है।

शीतला सप्तमी का व्रत
शीतला सप्तमी के व्रत का पालन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। इसके साथ ही माताएं ये व्रत अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए भी रखती हैं। इस दिन सुबह जल्दी उठकर हल्के गर्म पानी से स्नान किया जाता है और फिर व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिन भर व्रत का पालन करके महिलाएं शीतला माता के मंदिर जाती हैं और उनके समक्ष पूजा व आरती करती हैं। पूजा का अंत शीतला माता की कथा सुनकर किया जाता है। माता का आशीर्वाद प्राप्त करने तथा आनंदमय व स्वस्थ जीवन पाने के लिए कई अनुष्ठान किए जाते हैं। शीतला व्रत कथा पढ़ना भी एक पवित्र अनुष्ठान होता है।
इसके साथ ही शीतला माता की पूजा में ताज़ा बने हुए भोजन का सेवन नहीं किया जाता है। इस दिन व्रत पारण करने के पश्चात एक दिन पुराना खाना ही खाया जाता है।

शीतला सप्तमी का महत्व
शीतला सप्तमी के दिन व्रत और पूजन करने से चेचक, खसरा जैसी संक्रामक बीमारियों से राहत मिलती है। शीतला यानी शीतल का अर्थ होता है ठंडा, ऐसी मान्यता है कि माता इन संक्रमणों में राहत पहुंचाती हैं। इसके साथ ही इस दिन शीतला माता की कृपा पाने के लिए बच्चों का मुंडन भी कराया जाता है। इस दिन माताओं द्वारा व्रत रखने से उनकी संतानों को शीतला माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











