Latest Updates
-
Mangalwar Vrat: पहली बार रखने जा रहे हैं मंगलवार का व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम और पूजा विधि -
Sheetala Saptami Vrat Katha: शीतला सप्तमी के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा आरोग्य का आशीर्वाद -
Sheetala Saptami 2026: कब है शीतला सप्तमी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Sheetala Saptami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को दें शीतला सप्तमी की शुभकामना -
मंगलवार को कर लें माचिस की तीली का ये गुप्त टोटका, बजरंगबली दूर करेंगे हर बाधा -
लंच में बनाएं उत्तर प्रदेश की चना दाल कढ़ी, उंगलिया चाटते रह जाएंगे घरवाले -
Gangaur Ke Geet: 'आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै'...इन मधुर गीतों के बिना अधूरी है गौरा पूजा, यहां पढ़ें पूरे लिरिक्स -
प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीनों में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, वरना बच्चे की सेहत पर पड़ेगा बुरा असर -
Viral Video: टीम इंडिया की T20 वर्ल्ड कप जीत पर पाकिस्तान में जश्न, काटा केक और गाया 'जन-गण-मन' -
कौन हैं Mahieka Sharma? जिसके प्यार में 'क्लीन बोल्ड' हुए Hardik Pandya, देखें वायरल वीडियो
Lohri 2018: जानें लोहड़ी मनाई जाने के पीछे क्या है महत्व
भारत के दक्षिणी हिस्से में लोहड़ी का त्येाहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पंजाब में इसे फसलीय मौसम के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा भी इस त्येाहार को मनाने के और भी कई कारण हैं। जानिए इसके बारे में।
भारत एक ऐसा देश है जहां कई धर्मों के अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। यहां शायद ही ऐसा कोइ महीना या मौसम होगा जिसमें कोई त्योहार ना आता हो। हालांकि इन त्योहरों का महत्व और इन्हें मनाने का तरीका हर क्षेत्र में अलग-अलग है लेकिन फिर भी इनका महत्व और उत्साह बिलकुल भी कम नहीं है।

भारत एक कृषि प्रधान देश है लेकिन बड़ी हैरानी की बात है कि इस देश में कोई कृषि उत्सव नहीं मनाया जाता। ये इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि फसल काटने का वो समय होता है जब हम किसानों का और उगने वाली फसल के लिए प्रकृति का आभार व्यक्त करते हैं।
भारत में तो नहीं लेकिन इसके पंजाब और हरियाणा राज्य में लोहड़ी का उत्सव मनाया जाता है। इस त्योहार का महत्व कुछ इस प्रकार है :

1. कैसे हुई लोहड़ी की शुरुआत
लोहड़ी शब्द की उत्पत्ति के बारे में कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। इस शब्द के बारे में कहा जाता है कि लोह शब्द का मतलब लोहे से है। इस त्योहार पर मसालों को तैयार करने में लोहे की परत वाले तवों का प्रयोग किया जाता है और यहीं से इस त्योहार को ये नाम मिला है। किवदंती है कि एक बार होलिका और लोहड़ी नामक दो भाई-बहन थे। होली की अग्नि में होलिका जल गई लेकिन लोहड़ी बच गया। लोहड़ी के जीवित रहने की खुशी में ही ये त्योहार मनाया जाता है।

2. कृषि की सफलता
भारत एक कृषि प्रधान देश है। पंजाब और हरियाणा की भूमि उपजाऊ होने के मामले में थोड़ी सख्त है। इन जगहों पर एक ऐसा उत्सव मनाया जाता है जिसमें अपनी मेहनत से फसल उगाने वाले लोगों के प्रति आभार प्रकट किया जाता है। लोहड़ी यहां पर एक ऐसा ही त्योहार है। इसी वजह से पंजाब राज्य में लोहड़ी बहुत महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है।

3. नई पीढ़ी के बीच सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना
लोहड़ी के त्योहार की एक सबसे खास बात है कि इसमें बच्चे लोक गीत गाते हुए सभी के घर जाते हैं। उनके गीत के कारण लोग उन्हें गुड़, मूंगफली, चॉकलेट और पैसे देते हैं। तोहफों को देखकर बच्चों का इस त्येाहार में हिस्सा लेने का उत्साह और ज्यादा बढ़ जाता है। इसके ज़रिए उन्हें अपनी संस्कृति और मूल्यों के बारे में बहुत कुछ जानने का मौका मिलता है। पंजाबी घरों में ये त्योहार बहुत महत्व रखता है और इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

4. एकता का प्रतीक
लोहड़ी एक ऐसा त्योहार है जिस घर के सभी सदस्य मिलकर पंजाबी लोक गीतों पर खूब मस्ती करते हैं। बीच में आग जलाकर इसके चारों ओर लोग कई तरह के खेल और कार्यक्रम करते हैं। जहां एक ओर महिलाएं गिद्दा करती हैं तो वहीं दूसरी ओर पुरुष भांगड़ा करते हुए नज़र आते हैं। गाना, नृत्य और मौज-मस्ती में ही पूरी रात निकल जाती है। आग में लोग बजक, रेवड़ी, पॉपकॉर्न और मूंगफली डालते हैं। इस तरह लोहड़ी के त्योहार को एकता का प्रतीक भी कहा जा सकता है।

5. व्यंजनों की है सौगात
हम भारतीय खानपान को लेकर बहुत सजग रहते हैं। जाहिर सी बात है कि त्योहार के दौरान कई तरह की चीज़ें और मिठाईयां बनती हैं। ये त्योहार सरसों दा साग और मक्के की रोटी के साथ खीर के बिना अधूरा है।

6. सूर्य देव की आराधना
हम सभी जानते हैं कि संसार का यापन सूर्य देव के बिना अधूरा है और फसल में भी सूर्य देव अहम भूमिका निभाते हैं।
इस वजह से भी लोहड़ी के त्येाहार का अधिक महत्व है। मान्यता है किइस दिन सूर्य देव की उपासना करने से दोगुना फसल मिलती है। कुल मिलाकर इससे पशुओं और मनुष्य का फायदा होता है।

7. कड़ाके की ठंड
जनवरी के मध्य में लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है। इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस समय में कड़कड़ाती हुई सर्दी पड़ती है। इसी वजह से लोहड़ी के त्योहार पर आग जलाई जाती है।

8. मन की शांति
दूसरों के साथ खुशियां बांटने से आत्मसंतुष्टि की अनुभूति होती है और लोहड़ी का त्योहार भी कुछ ऐसा ही अनुभव देकर जाता है। इस कारण भी लोहड़ी के त्योहार का ज्यादा महत्व है। सभी लोग मिलकर शांति और सद्भाव के साथ लोहड़ी का त्योहार मनाते हैं। सिख और पंजाबी गुरु ग्रंथ साहिब का जाप करते हैं और लोहड़ी की अग्नि जलने से पहले ध्यान भी करते हैं।



Click it and Unblock the Notifications











