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Teja Dashmi 2021: तेजा दशमी जानिए तेजाजी महाराज की वीरता और साहस की कहानी
माना जाता है कि तेजाजी महाराज की पूजा करने से सांप के काटने का भय नहीं रहता है। प्रत्येक वर्ष की भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को तेजा दशमी का महापर्व मनाया जाता है। इस बार तेजा दशमी गुरुवार 16 सितंबर को है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के कई इलाकों में इस त्यौहार का बड़ा ही महत्व है। लोग बड़े धूमधाम से इस खास दिन को मनाते हैं। आइए आपको बताते हैं कि तेजा दशमी पर लोग किस तरह तेजाजी महाराज की पूजा अर्चना करते हैं और इससे जुड़ी कुछ और रोचक बातें।

तेजा जी महाराज का जन्म
29 जनवरी 1074 में नागौर जिले के खड़नाल गांव में तेजा जी महाराज का जन्म एक जाट परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम ताहरजी (थिरराज) और माता का नाम रामकुंवरी देवी था। कहा जाता है कि तेजाजी महाराज के माता-पिता को जब लंबे समय तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई तब उन्होंने माता पार्वती और भगवान शंकर की पूजा अर्चना की थी। कठोर तपस्या के बाद वरदान के रूप में उन्हें तेजाजी महाराज पुत्र के रूप में प्राप्त हुए थे।
कहते हैं कि तेजाजी के जन्म के बाद भविष्यवाणी हुई थी ताहरजी और रामकुंवरी देवी के घर में स्वयं भगवान ने जन्म लिया है।

जब तेजाजी महाराज को सांप ने डंसा
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार तेजाजी महाराज अपनी बहन के ससुराल गए थे। वहां उन्हें पता चला कि उनकी बहन की गायों को डाकू उठाकर ले गए हैं। उन्होंने अपनी बहन को वचन दिया कि वे अपनी बहन की सारी गायों को छुड़ाकर लाएंगे। जब डाकू की तलाश में वे जंगल की ओर जा रहे थे तब रास्ते में उन्हें नाग देवता मिले। उन्होंने नाग देवता से प्रार्थना की कि वे उन्हें अपनी बहन के गायों को ढूंढने तक का समय दें। गायों को ढूंढने के बाद वे स्वयं नाग देवता के समक्ष उपस्थित हो जाएंगे। उनकी यह प्रार्थना सुनकर नाग देवता रास्ते से हट गए। इसके बाद वे अपनी बहन की गायों को छुड़ा लाएं जिसके दौरान उन्हें काफी चोटें आई थी। जब तेजा जी महाराज नाग देवता के पास पहुंचे तो नाग देवता ने उनसे उनके लहूलुहान शरीर को देखकर कहा कि वे उन्हें कहा डंसे उनका पूरा शरीर पहले से ही चोटिल है तो तेजा जी ने अपनी जीभ निकालकर नाग देवता को डंसने की कहा।
तेजाजी महाराज की निडरता और साहस को देखकर नाग देवता बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने आशीर्वाद दिया कि अगर किसी व्यक्ति को सांप काटता है और वह तेजाजी महाराज के नाम का धागा बांधता है तो सांप के जहर का असर उस पर नहीं होगा। इसके बाद नाग देवता ने तेजाजी महाराज के जीभ पर डंक मार दिया।

भव्य मेले का होता है आयोजन
तेजा दशमी के दिन तेजाजी के मंदिरों में भव्य मेले का आयोजन होता है। दूर-दूर से लोग तेजाजी के मंदिर में आकर उन्हें रंग बिरंगी छतरियां चढ़ाते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में तेजा दशमी का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।



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