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ऐसा मूर्त रूप
Short Story
oi-Staff

इसलिए उसे अंदर नहीं आने दिया गया। रेंगेत्सू, शीत और भूख से बेहाल खेतों में से चलकर चेरी के एक वृक्ष के नीचे पहुँची जिसे उसने अपना आश्रय बनाया। काटने वाली ठंड (बहुत ज़्यादा ठंड) के कारण वह ठीक से सो नहीं पाई और उस जगह पर जंगली जानवरों का डर भी था।
आधी रात को जब वह बहुत ज़्यादा ठंड के कारण उठी, उसने वसंत ऋतु की रात में चेरी के सुंदर फूलों को देखा, धुँधले चंद्रमा की रोशनी में नहाई। वास्तव में वह एक बाँधने वाला दृश्य था ।
इस सुंदरता को जीतकर (सुंदरता से प्रभावित होकर) वह अपनी श्रद्धा व्यक्त करने गाँव की दिशा में चल पडी। उसने कहा: "आपने मुझे रहने के लिए स्थान न देकर जो दया दिखाई है उसके कारण ही मैं धुँधले चंद्रमा की रोशनी में फूलों को देख पाई।"
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English summary
The Embodiment Of Suchness | ऐसा मूर्त रूप
Story first published: Monday, August 13, 2012, 9:38 [IST]
Other articles published on Aug 13, 2012



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