ऐसा मूर्त रूप

The Embodiment Of Suchness
एक अध्यात्मिक सूफी महिला रेंगेत्सू धार्मिक यात्रा पर थी। एक रात वह सूर्यास्त के समय एक गाँव में पहुँची और उसने रहने के लिए जगह माँगी। सभी ने उसके खिलाफ दरवाज़े बंद कर दिए केवल इसलिए क्योंकि उसने क्रांतिकारी अध्यात्म का रास्ता अपनाया था जो परम्पराओं के विरुद्ध था।

इसलिए उसे अंदर नहीं आने दिया गया। रेंगेत्सू, शीत और भूख से बेहाल खेतों में से चलकर चेरी के एक वृक्ष के नीचे पहुँची जिसे उसने अपना आश्रय बनाया। काटने वाली ठंड (बहुत ज़्यादा ठंड) के कारण वह ठीक से सो नहीं पाई और उस जगह पर जंगली जानवरों का डर भी था।

आधी रात को जब वह बहुत ज़्यादा ठंड के कारण उठी, उसने वसंत ऋतु की रात में चेरी के सुंदर फूलों को देखा, धुँधले चंद्रमा की रोशनी में नहाई। वास्तव में वह एक बाँधने वाला दृश्य था ।

इस सुंदरता को जीतकर (सुंदरता से प्रभावित होकर) वह अपनी श्रद्धा व्यक्त करने गाँव की दिशा में चल पडी। उसने कहा: "आपने मुझे रहने के लिए स्थान न देकर जो दया दिखाई है उसके कारण ही मैं धुँधले चंद्रमा की रोशनी में फूलों को देख पाई।"

Story first published: Monday, August 13, 2012, 9:38 [IST]
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