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इकायू की मां की अन्तिम इच्छा और वसीयतनामा

प्यारे इकायू,
मैनें अपने जीवनकाल के सभी कार्य पूरे कर लिए है और अब मैं अंनतकाल के लिए जा रही हूं।
मेरी इच्छा है कि तुम एक अच्छे छात्र बनोगे और अपनी बौद्ध प्रकति को समझोगे। तुम जान पाओगे अगर मैं नरक में हुई या फिर तुम्हारे साथ हमेशा हूं या नहीं।
अगर तुम आदमी के तौर पर बनोगे जो कि यह एहसास करता है कि बुद्धा व उसके अनुयायी और बौद्धधर्मी तुम्हारे अनुयायी है, तुम अपनी पढ़ाई छोड़ सकते हों और मानवता के लिए काम काम करोगे। बुद्ध भगवान ने 140 साल उपदेश दिए और इस दौरान उन्होने एक भी उल्टा शब्द नहीं कहा। तुम्हे इसे क्यों जानना चाहिए क्योकि अगर तुम्हे नहीं पता है और तुम जानने की इच्छा रखते हो तो व्यर्थ सोच से बचों।
तुम्हारी मां
न जीवित, न मृत्यु
सितम्बर 1
अनुलेख: बुद्ध की शिक्षा वाला अभिलेखन, दूसरों को समझाने के लिए था। जो भी कहिए, अगर आप किसी प्रकिया पर निर्भर है तो केवल एक अज्ञानी कीड़े की तरह है। यहॉ बौद्ध के ऊपर 80,000 के लगभग किताबें है। अगर इनमें से प्रत्येक को पढ़ लिया जाऐ और उसके वाबजूद आप अपनी प्रकृति को नहीं जान पाऐ तो आप इस पत्र को भी नहीं समझ सकते है। यही मेरी अन्तिम इच्छा और वसीयतनामा है।
ज्ञानी लोगों को मानवता के लिए कार्य करने में ही परम सुख मिलता है और इसी आन्नद को पाने के लिए वह अपना सब कुछ त्याग कर देते है।



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