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पहली बार रख रही हैं Vat Savitri Vrat, न करें ये गलतियां; नोट करें पूजन सामग्री से लेकर व्रत कथा तक सब कुछ
How To Do Vat Savitri Vrat For First Time: वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने अटूट प्रेम, साहस और तपस्या के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पा लिए थे। तभी से वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य और पति की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। अगर आप पहली बार वट सावित्री व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और व्रत के नियमों को जानना बेहद जरूरी है। छोटी-सी गलती भी पूजा के फल को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में यहां जानिए वट सावित्री व्रत 2026 से जुड़ी हर जरूरी जानकारी।

वट सावित्री व्रत 2026 कब है?
वट सावित्रि व्रत की तारीख को लेकर असमंजस है तो आप जान लें कि अमावस्या तिथि प्रारंभ हो रही है 16 मई 2026, सुबह 05:11 बजे से और इसकी समाप्ति 17 मई 2026, रात 01:30 बजे होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार इस बार वट सावित्री व्रत 16 मई को रखा जाएगा।
वट सावित्री व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग का विशेष संयोग भी बन रहा है, जो पूजा के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।
पहली बार वट सावित्रि व्रत रखने वाली महिलाएं न करें ये गलतियां
अशुभ रंगों के कपड़े न पहनें
व्रत के दिन नीले, काले, सफेद और ग्रे रंग के कपड़े पहनने से बचें। लाल, पीले और गुलाबी रंग शुभ माने जाते हैं।
सोलह श्रृंगार जरूर करें
वट सावित्री व्रत सुहाग का पर्व है, इसलिए पूजा से पहले पूरा 16 श्रृंगार करें।
बरगद के पेड़ के आसपास रखें सफाई
पूजा स्थल और वट वृक्ष के आसपास अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
व्रत कथा सुने बिना पूजा अधूरी
सावित्री और सत्यवान की कथा सुने बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।
क्रोध और विवाद से बचें
पूरे दिन मन शांत रखें और किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें।
वट सावित्री व्रत की पूजा विधि जान लें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें।
बरगद के पेड़ के नीचे चौकी पर सावित्री-सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें।
रोली, हल्दी, अक्षत, फूल और दीपक से पूजा करें।
वट वृक्ष पर जल अर्पित करें और कच्चा सूत लपेटते हुए 5, 7, 11 या 108 बार परिक्रमा करें।
व्रत कथा सुनें और पति की लंबी आयु की कामना करें।
अंत में ब्राह्मण और सासु मां का आशीर्वाद लें।
वट सावित्री व्रत 2026 की पूजा सामग्री लिस्ट
मुख्य पूजा सामग्री
वट वृक्ष के लिए जल
सावित्री-सत्यवान की तस्वीर या मूर्ति
पूजा चौकी
लाल या पीला कपड़ा
गंगाजल
कलश
पूजन सामग्री
रोली
हल्दी
कुमकुम
अक्षत
फूल और माला
धूप, अगरबत्ती
कपूर
दीपक
जनेऊ
बरगद पूजा की सामग्री
कच्चा सूत या कलावा
बांस का पंखा
पान
सुपारी
नारियल
दक्षिणा
सुहाग सामग्री
सिंदूर
चूड़ियां
बिंदी
मेहंदी
चुनरी या साड़ी
भोग और प्रसाद
भीगे काले चने
गुड़
बताशे
मिठाई
खीर या पुआ
मौसमी फल
वट सावित्री व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री अत्यंत तेजस्वी और पतिव्रता थी। उन्होंने सत्यवान नामक राजकुमार को अपने पति के रूप में चुना। नारद मुनि ने बताया कि सत्यवान की आयु बहुत कम है, लेकिन सावित्री अपने निर्णय पर अडिग रहीं। विवाह के कुछ समय बाद ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सत्यवान जंगल में लकड़ी काटते समय मूर्छित होकर गिर पड़े और उनके प्राण निकल गए। यमराज उनके प्राण लेकर जाने लगे, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ीं। सावित्री की बुद्धिमानी, तपस्या और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। अंत में सावित्री ने ऐसा वर मांगा जिससे सत्यवान को पुनर्जीवन मिल गया। तभी से वट सावित्री व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाने लगा।



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