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गुरु की सभ्यता
Short Story
oi-Staff

गुरु ने तब कहा "क्योंकि काफी छोटी उम्र से मैंने अपने आप को शाकाहारी भोजन से पोषित किया है इसलिए मैं लोगों को देखता हूँ।" तब भी मुझमें चअन कुर्सी से उठने की हिम्मत नहीं होती है" राजकुमार गुरु के लिए श्रद्धा भाव लिए मंदिर से निकल गया।
अगले दिन राजकुमार द्वारा भेजा हुआ दूत गुरु से मिला। गुरु ने कुर्सी से उठ कर उसको मान दिया। गुरु के हैरान सेवक ने पूछा, "गुरु राजकुमार को देखकर आप अपनी कुर्सी से नहीं हिले, पर उसके दूत को देखकर आप कुर्सी से क्यों उठ गए।"
गुरु ने प्रत्युत्तर दिया "मेरी सभ्यता तुमसे अलग है। जब एक उच्च पद का इंसान आता है तो मैं उसे अपनी कुर्सी से संबोधित करता हूँ। जब एक मध्य संवर्ग का इंसान आता है मैं उसे संबोधित करने के लिए कुर्सी से उतर जाता हूँ और जब एक नीचे तबके का इंसान मेरे पास आता है, मैं मंदिर के बाहर कदम रख देता हूँ।"
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English summary
The Master's Etiquette | गुरु की सभ्यता
Story first published: Monday, October 8, 2012, 17:12 [IST]
Other articles published on Oct 8, 2012



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