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शुभ कार्य से पहले क्यों तोड़ा जाता है नारियल?
भारत में हर शुभ कार्य से पहले नारियल तोड़ा जाता है। चाहे नई गाड़ी ली हो या फिर नए घर में गृह प्रवेश, हिन्दू परंपरा की पूजा में किसी भी नए व शुभ कार्य की शुरुआत नारियल तोड़कर ही की जाती है। यह महज़ एक परम्परा मात्र नहीं अपितु एक भाव भी होता है जिसमें ख़ुशी और जोश प्रदर्शित होता है। चलिए जानते हैं शुभ कार्यों की शुरुआत में नारियल तोड़ने के क्या होते हैं कारण -

ईश्वर को चढ़ाया जाता है
नारियल को भगवान के लिए चढ़ावे के रूप में देखा जाता है। किसी भी नई चीज़ जैसे नई गाड़ी, नया घर या नए व्यापार की शुरुआत में भगवान् को शुक्रिया अदा करने के लिए नारियल को तोड़कर उसे भोग/प्रसाद स्वरुप चढ़ाया जाता है।
दक्षिण भारत में नारियल के पेड़ को धार्मिक रूप से उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना उत्तर भारत में पीपल, बरगद और नीम को माना जाता है।

भगवान विष्णु से है सम्बन्ध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब श्री हरि विष्णु धरती पर अवतार लेकर आये थे तब अपने साथ मानवजाति के कल्याण के लिए माता लक्ष्मी, कामधेनु गाय और नारियल लाए थे। नारियल को त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का द्योतक माना जाता है। इसे कल्याण और बरकत का संकेत भी माना जाता है।

नारियल तोड़ने की प्रक्रिया में है कई महत्वपूर्ण संकेत
नारियल तोड़ने की प्रक्रिया के हर चरण में एक सन्देश मिलता है।
नारियल के ऊपरी रेशों को निकालने का अर्थ अपने जीवन से भौतिक आकांक्षाओं और मोह को निकालने से होता है।
इसके बाद नारियल के सख़्त खोल को तोड़नी की प्रक्रिया यह संकेत करती है कि हमें भी अपने जीवन और स्वयं से अहंकार की सख़्त परत तोड़ देनी चाहिए।
नारियल के टूटते ही अंदर के पानी का खोल से बाहर निकलना यह दर्शाता है कि हमें भी अपने भीतर की नकरात्मकता को ऐसे ही बहने देना चाहिए।
नारियल का सबसे भीतर मुलायम हिस्सा शान्ति का संकेत है जिसको प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

अन्य फायदे
नारियल इन सबके अलावा स्वास्थ्य कारणों से भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह शरीर के पाचन क्रिया में सहायक होता है। इसका पानी शरीर को तुरंत हाइड्रेट करने में मदद करता है। यह किडनी और दिल के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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