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शिक्षण का गलाघोंटू तरीका

सवाल पूछने वाला, गुरू के इस रवैये से कांप उठा क्योंकि उसने गुरू के द्वारा ऐसा जवाब मिलने की उम्मीद नहीं की थी। रिनजाई उस आदमी के पास आए और दोनो हाथों से उसका गला पकड़ लिया और दबाना शुरू कर दिया। आदमी की ऑखें बाहर को निकलने लगी और गुरू ने उससे पूछा कि वह कौन है? साथ ही अपनी ऑखें बन्द रखे। आदमी ने गुरू की बात मानी।
रिनजाई ने फिर से पूछा- वह कौन है? उस समय, आदमी ने अपनी ऑखें खोली, हॅसा और गुरू के ऊपर गिर पड़ा। रिनजाई से किसी ने पूछा- अगर शिक्षण का यह तरीका सभी पर लागू किया जाए। गुरू ने नकारात्मक जवाब दिया और स्पष्ट किया कि यह आदमी इस के लिए तैयार था। वह केवल प्रश्न नहीं पूछ रहा था बल्कि वह इसके लिए तैयार था। प्रथम भाग पूरी तरह किया गया था जब उसने सवाल पूछा।
यह प्रश्न उसके लिए जीवन और मौत का था कि आत्मा क्या है? उसका जीवन से पूर्णत: मोहभंग हो गया था तभी उसने पूछा कि आत्मा क्या है? यह जिन्दगी उसके लिए मौत के समान साबित हुई तभी वह पूछ रहा था कि जिन्दगी क्या है? मैनें उसे कोई सार्थक जवाब नहीं दिया है। मैनें उसे केवल वर्तमान में जीने में मदद की।



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