सच्चाई घर गयी

Slippers
र्योकन के भतीजे को ज़मीन जायदाद के मामले से मुक्त कर दिया गया था क्योंकि उसने अपने जीवन को ज़ेन की पढ़ाई के लिए समर्पित कर दिया था। संबंधियों के उपदेश के बावजूद वह पैसे एक वेश्या पर खर्च करता था। उसके रिश्तेदार उसके द्वारा संपत्ती के अपव्यय और अधमता से डरे हुए थे। उत्सुक संबंधियों ने र्योकन को अपने भतीजे के तौर-तरीके पर नियंत्रण रखने की सलाह दी।

र्योकन ने अपने भतीजे से मिलने के लिए लम्बी दूरी तय की। भतीजा उससे मिलकर काफी खुश हुआ और उसे रात को रुकने की सिफारिश की। र्योकन ने भतीजे की बात मान ली और पूरी रात ध्यान लगाकर गुज़ार दी।

सुबह होते ही र्योकन का ध्यान से निकलने का समय हो गया क्योंकि जाने का समय नज़दीक आ गया। चलते वक़्त उसने अपने भतीजे को यह कहकर अपने चप्पल की डोरी बांधने को कहा कि बुढ़ापे से उसके हाथ कांपने लगे हैं। भतीजे ने स्वेच्छा से अपने चाचा कि मदद की। र्योकन ने उसे धन्यवाद देते हुए कहा: "एक इंसान दिन-ब-दिन बूढ़ा और कमज़ोर होता जाता है।

अपना ध्यान रखना" यह कहते हुए वह बिना उस वेश्या या संबंधियों की शिकायतों के बारे में कोई बात करते हुए वहां से निकल गया। सच्चाई घर तक गयी और उस सुबह से भतीजे में स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिला।

Story first published: Monday, August 6, 2012, 10:20 [IST]
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