दो साधू

यात्रा पर निकले दो साधुओं को नदी के किनारे एक नवयुवती मिली। पानी के प्रवाह से सजग उस नवयुवती ने उनसे नदी पार करवाने का अनुरोध किया। एक साधू हिचकिचाया पर दूसरे ने उसे शीघ्र कंधे पर उठाया, नदी पार करवाया और किनारे पर उतार दिया। नवयुवती ने उस साधू को धन्यवाद दिया और चली गयी। साधुओं ने अपनी यात्रा ज़ारी रखी, पर एक साधू विचारमग्न रहा।

जब वह अपनी चुप्पी पर नियंत्रण ना रख सका तो बोला: "भाई, हमारा धार्मिक प्रशिक्षण हमें किसी भी औरत को हाथ ना लगाने की शिक्षा देता है, पर आपने उस नवयुवती को कंधे पर उठाकर नदी पार करवाया!" "भाई", दूसरे साधू ने कहा "मैने उसे किनारे पर उतार दिया पर तुम तो उसे अभी तक ढ़ो रहे हो।"

(इस कहानी के कुछ प्रारूप नवयुवती को कीचड़ का तालाब पार करवाने का विवरण देते हैं)

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