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थूकना या प्रणाम करना
Short Story
oi-Staff

दोनो आंगतुक काफी हैरान थे और हाकउयीन जैनजी जोकि मठ के संस्थापक थे, उनकी प्रतिमा का उद्घाटन करने आऐ थे। वे घबराऐ हुऐ थे, तभी रोशी ने उन्हे प्रतिमा को जलती हुई धूप से श्रंद्धाजलि देने के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद, नाकागावा
प्रतिमा के समक्ष झुकते है तो दर्शक भड़क जाते है और कहते है- पुराने चीनी गुरू, बुद्ध की प्रतिमा के सामने झुकते थे या झगड़ा करते थे। तुम क्यों झुक रहे हो?
रोशी ने उत्तर दिया- अगर तुम थूकना या झगड़ा करना चाहते हो तो करो, लेकिन मैं झुकना ही पंसद कंरूगा।
व्यक्ति को धार्मिक बनने के लिए जमीनी स्तर से जुड़ाव होना बेहद आवश्यक होता है।
Comments
English summary
To spit or to bow | थूकना या प्रणाम करना
Story first published: Tuesday, August 14, 2012, 9:57 [IST]
Other articles published on Aug 14, 2012



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