Latest Updates
-
World No Tobacco Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व तंबाकू निषेध दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
Bihari Breakfast Special Dahi Chura Recipe: पारंपरिक स्वाद के साथ झटपट तैयार करें -
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी -
Param Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है परम एकादशी? नोट करें सही डेट और पारण का समय -
माचा नहीं हल्दी, केल नहीं मोरिंगा: विदेशी सुपरफूड्स से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं भारत के ये 5 देसी खजाने -
आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, जानें सेहत को होने वाले नुकसान -
Silao Style Crispy Khaja Recipe: घर पर बनाएं बिहार की मशहूर परतदार मिठाई -
Electricity Price Hike: यूपी की जनता को झटका! 10% बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जानें कम बिल लाने के 5 अचूक उपाय -
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर
Tulsi Vivah 2021: तुलसी विवाह का पूजन करने से मिलता है कन्यादान जितना पुण्य, जानें तिथि व शुभ मुहूर्त
देव उठानी एकादशी का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। इसकी महत्ता तुलसी विवाह के शुभ अवसर के कारण और भी बढ़ जाती है। तुलसी विवाह के उपलक्ष्य में माता तुलसी का विवाह शालिग्राम के साथ पूरे विधि विधान के साथ किया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी विवाह संपन्न किया जाता है।

तुलसी विवाह क्या है और जानें इसका महत्व
मान्यताओं के अनुसार एकादशी को भगवान् विष्णु अपने चातुर्मास के शयनकाल से उठते हैं इसलिए इस दिन को देवउठानी भी कहा जाता है। यह दिन बड़ा ही शुभ माना गया है। इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने अपने शालिग्राम अवतार में माता तुलसी से विवाह संपन्न किया था।
तुलसी विवाह करने से कन्यादान जितने पुण्य की प्राप्ति होती है। तुलसी और भगवान शालीग्राम का विधिवत पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं एवं मोक्ष प्राप्ति के द्वार खुलते हैं। वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाओं से भी मुक्ति प्राप्त होती है।

तुलसी विवाह शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि 15 नवंबर को सुबह 06:39 पर समाप्त होगा और द्वादशी तिथि का आरंभ होगा। तुलसी विवाह 15 नवंबर 2021, सोमवार को किया जाएगा। द्वादशी तिथि 16 नवंबर को सुबह 08:01 तक है।

तुलसी विवाह की विधि
दो साफ़ लकड़ी की चौकी लेकर उसपर आसन बिछाएं। एक पर तुलसी जी का पौधा और एक पर भगवान शालिग्राम को स्थापित करें। दोनों चौकियों के ऊपर गन्ने से छोटा सा मंडप सजाएं। तुलसी पर लाल रंग की चुन्नी व अन्य श्रृंगार की चीज़ें सजाएं। कलश में जल रखें और आम के पत्ते भी रख लें। दोनों के समक्ष दीप जलाएं व कुमकुम से तिलक करें। इसके बाद शालिग्राम की पूजा करके उनके द्वारा तुलसी जी की सात बार परिक्रमा करवाएं। दोनों की आरती करके मंगलकामना करें व प्रसाद वितरित करें। इस प्रकार तुलसी विवाह संपन्न हो जायेगा।



Click it and Unblock the Notifications