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बैकुंठ चतुर्दशी इस मूहूर्त में करें पूजन

हिंदू धर्म में कार्तिक माह को पुण्य भलाई माह कहा जाता है। सनातन धर्म में इस माह का बहुत ही महत्व है। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी के दिन को बैकुण्ठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस बार आज यानी 2 अक्टूबर को यह दिन मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और शिव की पूजा की जाती है।
बैकुंठ चतुर्दशी का वर्णन शास्त्र निर्णयसिन्धु, स्मृतिकौस्तुभ व पुरुषार्थ चिंतामणि में बताया गया है। कहा जाता है जो इस दिन भगवान विष्णु और शिव की पूजा करता है, वो सारे पाप से मुक्त होकर बैकुंठ धाम जाता है।
बैकुंठ धाम भगवान विष्णु का निवास और सुख का धाम माना गया है। इस दिन पूजा करने से लक्ष्मी और शक्ति प्रसन्न होती है और द्ररिद्रता दूर होती है।

बैकुंठ धाम में मिलता है स्थान
मान्यता है कि जो भगवान विष्णु की 101 कमल से पूजा करते है वो अपने कुल के साथ बैकुंठ धाम को भोगते है। ज्योतिषों के अनुसार हर वर्ष इस दिन स्वर्ग का दरवाजा खुला रहता है, इसलिए जो भी व्यक्ति इस दिन शरीर त्यागते है वो सीधा बैकुंठ धाम जाता है।

भगवान चिष्णु को मिला था सुदर्शन
शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार ये वो पावन तिथि जब भगवान शिव ने भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र दिया था। ये एक ऐसा दिन है जब भगवान शिव और विष्णु को समान रुप से पूजा जाता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने प्रकट होकर विष्णु को सर्वश्रेष्ट भक्त का वर दिया। यही कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी बैकुंठ चतुर्दशी कहलाती है। इस दिन व्रत पूर्वक जो विष्णु व शिव का पूजन करता है उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होगी।

पूजा मूहूर्त
चतुर्दशी तिथि का मूहूर्त समय 2 नवंबर 2017 को 6 बजकर 41 मिनट से बजे से 3 नवंबर 2017 को 4 बजकर 16 मिनट बजे तक रहेगा।

पूजा विधि
बैकुंठ चतुदर्शी के सुबह और शाम को भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद भगवान शिव की पूजा की जाती है। भगवान विष्णु को चंदन मिले जल से नहलाएं, स्नान के बाद पीले वस्त्र और पीले फूल चढ़ाएं। इसके बाद शिवलिंग पर दूध मिले जल को चढ़ाएं और आंकड़े के फूल चढ़ाए, अक्षत और बेल पत्र अर्पित कर चंदन और घी का दीप जलाएं और दूध की मिठाएं प्रसाद में चढ़ाएं।
इसके बाद भगवान विष्णु और शिव का मंत्रों का स्मरण करें।

इसके बाद कमल के फूल चढ़ाएं।
फिर त्रिदेव की कपूर से आरती करें और दीपदान करें। इसके बाद सरोवर या तालाब किनारें 14 दीपक जलाएं।
कहा जाता है जो इस दिन पूजा करते है उन्हें भगवान शिव और विष्णु की असीम कृपा बनी रहती है।



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