Latest Updates
-
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत के जरूरी नियम -
Happy Sawan Somwar 2026 Wishes: शिव का नाम...सावन के पहले सोमवार पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामनाए संदेश -
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं -
Sawan Somwar Vrat 2026: क्या पीरियड्स में सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र -
World Lung Cancer Day 2026: स्मोकिंग न करने वालों को भी हो सकता है लंग कैंसर, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव -
August 2026 Vrat Tyohar: सावन शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक, देखें अगस्त में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट
Vat Savitri Vrat: इस व्रत को करने से महिलाओं को मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। विवाहित महिलाएं पूरे साल इस दिन का इंतजार करती हैं। वट सावित्री अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। महिलाएं भी ये व्रत पति की लंबी आयु और साथ ही संतान के सुखद जीवन की कामना की पूर्ति के लिए करती हैं। हर वर्ष ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को ये व्रत रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास है इसलिए इस दिन इसका पूजन किया जाता है। जानते हैं साल 2021 में वट सावित्री व्रत किस दिन रखा जाएगा। साथ ही जानते हैं शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।

वट सावित्री व्रत तिथि
वट सावित्री व्रत तिथि: 10 जून 2021, गुरुवार
अमावस्या प्रारंभ: 9 जून 2021 को दोपहर 01:57 बजे
अमावस्या समाप्त: 10 जून 2021 को शाम 04:20 बजे
व्रत पारण : 11 जून 2021, शुक्रवार

वट सावित्री व्रत का महत्व
इस व्रत को काफी शक्तिशाली और महत्वपूर्ण माना गया है। इस व्रत को विवाहित महिलाओं के अलावा कुंवारी कन्याएं भी करती हैं। सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ ही वो अखंड सौभाग्य का वरदान भी मांगती हैं। इस तिथि की महत्ता इसलिए अधिक है क्योंकि इसी दिन सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले आई थीं।

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि
महिलाएं इस दिन सुबह उठकर स्नान करें। साफ वस्त्र पहनें। आप नए वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। वट वृक्ष के आसपास गंगाजल का छिड़काव करें। एक बांस की टोकरी लें और उसमें सत अनाज भर दें। इसके ऊपर ब्रह्माजी, सावित्री और सत्यवान की मूर्ति रखें। ध्यान रहे कि सावित्री की मूर्ति ब्रह्माजी के बाईं ओर हो और सत्यवान की दाईं ओर।
वट वृक्ष को जल अर्पित करें। इसके बाद फल, फूल, मौली, चने की दाल, सूत, अक्षत, धूप-दीप, रोली आदि से वट वृक्ष की पूजा करें। बांस के पंखे से सावित्री-सत्यवान को हवा करें। बरगद के एक पत्ते को अपने बालों में लगा लें।
वट वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की कथा सुनें। इसके बाद अपने लिए अखंड सुहाग की कामना करें। सूत के धागे से वट वृक्ष की तीन बार परिक्रमा करें। आप चाहें तो 5, 11, 21, 51 या 108 बार बरगद के पेड़ की परिक्रमा कर सकती हैं।
परिक्रमा करने के बाद बांस के पत्तल में चने की दाल और फल, फूल नैवैद्य आदि डाल कर दान करें। ब्राह्मण को दक्षिणा दें। इस पूजा के संपन्न होने के बाद आपने जिस बांस के पंखे से सावित्री और सत्यवान को हवा किया था, उसे घर लेकर जाएं और पति को भी हवा करें। आप प्रसाद में चढ़े फल आदि ग्रहण कर सकती हैं और शाम के समय मीठा भोजन करें।



Click it and Unblock the Notifications