Latest Updates
-
Somvar Vrat Katha: सोमवार व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान शिव पूरी करेंगे हर मनोकामना -
Aaj Ka Rashifal, 20 April 2026: मालव्य योग से चमकेंगे इन राशियों के सितारे, जानें आज का भाग्यफल -
Birthday Wishes for Boss: बॉस के बर्थडे पर भेजें ये खास और सम्मानजनक शुभकामनाएं, बोलें 'हैप्पी बर्थडे' -
पुरानी कब्ज और बवासीर से पाना है छुटकारा, तो इस पौधे की जड़ का करें इस्तेमाल -
वजन कम करने के लिए रोटी या चावल क्या है बेस्ट? करना है वेट लॉस तो जान लें ये 5 बातें -
दीपिका पादुकोण ने शेयर की सेकंड प्रेगनेंसी की गुड न्यूज, 40 की उम्र में मां बनना है सेफ -
Chardham Yatra करने से पहले पढ़ लें ये 5 बड़े नियम, इन लोगों को नहीं मिलेगी यात्रा की अनुमति -
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 10 रुपये के नमक का ये टोटका, रातों-रात बदल देगा आपकी किस्मत -
Akshaya Tritiya Wishes: घर की लक्ष्मी को इन खूबसूरत संदेशों के जरिए कहें 'हैप्पी अक्षय तृतीया' -
Akshaya Tritiya Vrat Katha: अक्षय तृतीया के दिन जरूर पढ़ें यह कथा, मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद
Vat Savitri Vrat: इस व्रत को करने से महिलाओं को मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। विवाहित महिलाएं पूरे साल इस दिन का इंतजार करती हैं। वट सावित्री अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। महिलाएं भी ये व्रत पति की लंबी आयु और साथ ही संतान के सुखद जीवन की कामना की पूर्ति के लिए करती हैं। हर वर्ष ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को ये व्रत रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास है इसलिए इस दिन इसका पूजन किया जाता है। जानते हैं साल 2021 में वट सावित्री व्रत किस दिन रखा जाएगा। साथ ही जानते हैं शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।

वट सावित्री व्रत तिथि
वट सावित्री व्रत तिथि: 10 जून 2021, गुरुवार
अमावस्या प्रारंभ: 9 जून 2021 को दोपहर 01:57 बजे
अमावस्या समाप्त: 10 जून 2021 को शाम 04:20 बजे
व्रत पारण : 11 जून 2021, शुक्रवार

वट सावित्री व्रत का महत्व
इस व्रत को काफी शक्तिशाली और महत्वपूर्ण माना गया है। इस व्रत को विवाहित महिलाओं के अलावा कुंवारी कन्याएं भी करती हैं। सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ ही वो अखंड सौभाग्य का वरदान भी मांगती हैं। इस तिथि की महत्ता इसलिए अधिक है क्योंकि इसी दिन सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले आई थीं।

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि
महिलाएं इस दिन सुबह उठकर स्नान करें। साफ वस्त्र पहनें। आप नए वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। वट वृक्ष के आसपास गंगाजल का छिड़काव करें। एक बांस की टोकरी लें और उसमें सत अनाज भर दें। इसके ऊपर ब्रह्माजी, सावित्री और सत्यवान की मूर्ति रखें। ध्यान रहे कि सावित्री की मूर्ति ब्रह्माजी के बाईं ओर हो और सत्यवान की दाईं ओर।
वट वृक्ष को जल अर्पित करें। इसके बाद फल, फूल, मौली, चने की दाल, सूत, अक्षत, धूप-दीप, रोली आदि से वट वृक्ष की पूजा करें। बांस के पंखे से सावित्री-सत्यवान को हवा करें। बरगद के एक पत्ते को अपने बालों में लगा लें।
वट वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की कथा सुनें। इसके बाद अपने लिए अखंड सुहाग की कामना करें। सूत के धागे से वट वृक्ष की तीन बार परिक्रमा करें। आप चाहें तो 5, 11, 21, 51 या 108 बार बरगद के पेड़ की परिक्रमा कर सकती हैं।
परिक्रमा करने के बाद बांस के पत्तल में चने की दाल और फल, फूल नैवैद्य आदि डाल कर दान करें। ब्राह्मण को दक्षिणा दें। इस पूजा के संपन्न होने के बाद आपने जिस बांस के पंखे से सावित्री और सत्यवान को हवा किया था, उसे घर लेकर जाएं और पति को भी हवा करें। आप प्रसाद में चढ़े फल आदि ग्रहण कर सकती हैं और शाम के समय मीठा भोजन करें।



Click it and Unblock the Notifications











