सपनों की दुनिया की सैर

Dreamland
सोयेन शाकु के एक शिष्य ने अपनी पाठशाला के गुरू के बारे में बताया जो नियमित रूप से दोपहर की झपकी लिया करते थे। "हम बच्चों ने उनसे पूछा वे रोज दोपहर में क्यों सोते हैं और हमारे गुरू ने उत्तर दिया: "मैं सपनों की दुनिया में पुराने ऋषियों से मिलने जाता हूँ जैसा कन्फ्युशियस करते थे।"

जब कन्फ्युशियस सोते थे तब वह प्राचीन संतों के स्वप्न देखते थे और बाद में अपने अनुयायियों को उनके बारे में बताते थे।
"एक दिन बहुत ज़्यादा गर्मी थी और हम में से कुछ दोपहर की झपकी ले रहे थे। गुरू नाराज़ हो गए और हमें सजा दी। इसलिए हमने उनसे कहा कि हम सपनों की दुनिया में प्राचीन संतों से मिलने गए थे जैसा कन्फ्युशियस करते थे।"

‘तुम्हें क्या सन्देश मिला?", गुरू ने पूछा?"
"हमारे बीच में से एक ने कहा, हम सपनों की दुनिया में गए और संतों से मिले और उनसे पूछा कि क्या हमारे शिक्षक हर दोपहर यहाँ आते है परंतु वे बोले उन्होंने ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं देखा है।"

Story first published: Friday, October 12, 2012, 16:32 [IST]
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