Latest Updates
-
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 30 May 2026: शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, शनिदेव की कृपा से होगा धन लाभ -
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास
ऐसे शुरु हुई मंदिर के ऊपर ध्वजा लगाने की परंपरा, दर्शन मात्र से जीवन में होता है सब शुभ
हिन्दू मंदिरों के शिखर पर कलश और उसके साथ लहराती हुई पताका आपने जरुर देखी होगी। त्रिकोणीय आकार के ध्वज, मंदिर के सबसे ऊपरी भाग में लहराते रहते हैं। सामान्यतः उन ध्वजों पर कोई प्रतीक चिन्ह भी दिखाई देता है। आमतौर पर ध्वज का रंग केसरिया या गेरुआ होता है किन्तु विशेष कारणों से ध्वजों का रंग पीला, लाल या अन्य रंग भी हो सकता है। क्या आपने सोचा है कि ये ध्वज मंदिर के शिखर पर क्यूँ लगाए जाते हैं? ध्वज लगाने की परंपरा कब शुरू हुई? इन ध्वजों को देखकर भक्त प्रणाम क्यों करते हैं? और ध्वज का आकार त्रिकोणीय ही क्यों होता है? आइये आपको बताते हैं।

ध्वज लगाने की परंपरा कब शुरू हुई?
ऐसी मान्यता है की पहले देवों और असुरो में युद्ध होता रहता था। देवासुर संग्राम तो आपने सुना ही होगा। इस युद्ध में मायावी असुर अपना भेष बदल सकते थे। कौन किस पक्ष से युद्ध कर रहा है इसकी पहचान के लिए देवों ने अपने रथों के ऊपर ध्वज लगाना शुरू किया। तभी से देवों के मंदिरों पर भी ध्वज लगाने की परंपरा शुरू हुई।

ध्वज मंदिर के शिखर पर क्यूँ लगाए जाते हैं?
ऐसा माना जाता है कि ध्वजा नवग्रह को धारण किये होती है, जो रक्षा कवच का काम करती है। ये ध्वज मंदिर की रक्षा करते हैं। दूसरी बात ये है कि ध्वज देखने और प्रणाम करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है लेकिन ध्वज तभी दिखेगा जब ये ऊंचाई पर हो इसलिए इसे मंदिर के शिखर पर लगाते हैं ताकि दूर से ही दिख जाए।

इन ध्वजों को देख कर भक्त प्रणाम क्यों करते हैं?
शास्त्रों में कई जगह लिखा गया है कि "शिखर दर्शनम पाप नाशम"। इसका अर्थ है कि शिखर के दर्शन कर लेने से पाप नष्ट हो जाते हैं। किसी कारण से मंदिर ना जा पाएं तो ध्वज को ही प्रणाम कर लें। ऐसा करना शुभकारी होता है।

ध्वज का आकर त्रिकोणीय ही क्यों होता है?
इसका वैज्ञानिक कारण है। वायुगतिकी के अनुसार एक त्रिकोणीय झंडे को फहराने के लिए न्यूनतम हवा का वेग चाहिए। वहीं एक आयताकार ध्वज को फहराने के लिए ज्यादा हवा का वेग चाहिए। त्रिकोणीय आकार के पीछे मंशा यही है कि कम हवा में भी ध्वज लहराता रहे।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications