Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
आखिर क्यूं काटा परशुराम ने अपनी मां का सिर?
आपने अक्सर यह कथा सुनी होगी कि भगवान परशुराम ने अपनी माता का सिर काट लिया था। लेकिन हममें से कितने लोगों को इसके पीछे का कारण पता है। शायद बहुत कम लोगों को मालूम होगा। आइए जानते हैं कि भगवान परशुराम ने अपनी माता का सिर क्यूं काट लिया था:
READ: द्रौपदी के बारे में दिलचस्प तथ्य जिनके बारे में कोई नहीं जानता
भगवान परशुराम, ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे। ऋषि जमदग्नि को उनके क्रोध के लिए जाना जाता है। परशुराम, भगवान शिव के पुत्र थे और उन्हे घोर तपस्या के बाद भगवान से परशु प्राप्त हुआ था जो एक प्रकार का शस्त्र था। उसी शस्त्र के मिलने के बाद उनका नाम परशु पड़ा। कहा जाता है कि जब परशुराम छोटे थे तो वह बहुत ज्ञानी थे और झट से सारी बातों को सीख लेते थे।

पिता की बात पत्थर की लकीर
वह अपने पिता की आज्ञा को बहुत मानते थे, उनके लिए पिता की बात पत्थर की लकीर थी। परशुराम को प्रथम योद्धा ब्राहम्ण के रूप में जाना जाता है और उन्हे ब्राहम्णक्षत्रिय भी कहा जाता था, क्योंकि वह पैतृक ब्राहम्ण ही थे, लेकिन उनमें गुण एक क्षत्रिय की तरह थे। उनकी माता, रेणुका एक क्षत्रिय की बेटी थी। परशुराम को परशु मिलने के बाद उन्हे इस धरती पर हरा देना किसी के लिए भी संभव नहीं था।

परशुरात के माता-पिता जी
परशुराम के माता-पिता, बहुत आध्यात्मिक किस्म के थे। उनकी माता को पानी पर पूर्ण अधिकर था और उनके पिता का अग्नि पर अधिकार था। कहा जाता है कि रेणुका, गीली मिट्टी के घड़े में भी पानी को भर लेती थी।

इसलिये किया उन्होने अपनी माता का सिर धड़ से अलग
एक बार, ऋषि ने अपनी पत्नी रेणुका को पानी भरकर लाने को कहा, रेणुका का मन स्त्री होने के नाते थोड़ा विचलित था, जिस वजह से बर्तन टूट गया और पानी ऋषि पर गिर गया, इससे ऋषि क्रोधित हो गए और उन्होने परशुराम को बुलाया। परशुराम को सामने खड़ा करके उन्होने आदेश दिया कि अपनी माता का सिर, धड़ से अलग कर दो। परशुराम ने ऐसा कर दिया। इससे ऋषि प्रसन्न हो गए और उन्होने अपने पुत्र से एक वरदान मांगने को कहा। परशुराम ने अपने पिता से वरदान मांगा कि - वह माता को जीवित कर दें और उनकी स्मृति को उस दौरान के लिए खत्म कर दें, जब उन्होने सिर को धड़ से अलग कर दिया था। चूंकि, ऋषि जमदग्नि को दिव्य शक्तियां प्राप्त थी, तो उन्होने रेणुका को जीवन प्रदान कर दिया।

कामधेनु गाय के पीछे हुई पिता की मृत्यु
ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका को परशुराम जैसे पुत्र के अलावा, कामधेनु गाय भी मिली हुई थी। एक दिन ऋषि, आश्रम से बाहर चले गए और उस दौरान कुछ क्षत्रिय आश्रम में आ गए। उन लोगों को भूख लगी थी, उन्होने कुछ खाने को मांगा, तो माता रेणुका ने कामधेनु को बोला और उसने कई प्रकार के व्यंजन दे दिए। उन लोगों को कामधेनु को देखकर आश्चर्य हुआ। उन्होने अपने राजा कर्तावीर्या सहस्त्रार्जुन के लिए उस गाय को खरीदने का प्रस्ताव रखा, लेकिन आश्रम के साधुओं ने नकार दिया। वे जबरन गाय को ले जाने लगे, तो परशुराम ने सभी को मार डाला और गाय को वापस आश्रम में ले आएं। लेकिन इसके बदले में राजा सहस्त्रार्जुन के बेटे ने जमदग्नि को मार डाला। जब परशुराम अपने आश्रम में वापस आएं तो उन्होने अपने पिता को मृत पाया। उन्होने देखा कि उनके पिता के शरीर पर 21 घाव थे। इसके बाद परशुराम ने राजा के सभी पुत्रों को मार दिया।

युद्ध की कला में थे माहिर
परशुराम ने भीष्म पितामह को युद्ध की कलाएं सिखाई थी। इसके अलावा, उन्होने द्रोणाचार्य और कर्ण को भी शिक्षा दी थी। कहा जाता है कि परशुराम अमर हैं। वह भगवान कल्कि को भी युद्ध की नीतियां सिखाएंगें, जो भगवान विष्णु के दसवें अवतार होगें।

भगवान गणेश का भी सिर काट दिया
एक बार भगवान परशुराम, भगवान शिव के दर्शन करने हेतु हिमालय गए। रास्ते में उन्हे भगवान गणेश मिल गए, जिन्होने कहा कि उनकी माता अंदर है और वहां कोई नहीं जा सकता है। परशुराम को गणेश जी के बारे में पता नहीं था, उन्होने गणेश जी से लड़ने को कहा। इस लड़ाई में परशुराम ने भगवान गणेश की सिर काट दिया। जब माता पार्वती ने यह देखा तो उन्हे क्रोध आया, आदिशक्ति होने के कारण उन्होने परशुराम पर क्रोध किया और इससे भगवान शिव भी उन्हे नहीं रोक पाएं।

भगवान गणेश ने अपनी माता को समझाया
माता पार्वती ने उनसे कहा कि क्षत्रियों के रक्त से उनका मन नहीं भरा तो उन्होने उनके पुत्र को नुकसान पहुंचा दिया। इसके बाद, भगवान गणेश ने अपनी माता को समझाया और परशुराम को माफ करने को कहा। इस पर, प्रसन्न होकर परशुराम ने उन्हे अपना परशु उपहार में दे दिया।



Click it and Unblock the Notifications
