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भाई-बहन के दिलों को जोड़े भाईदूज का पर्व
भाई और बहन का रिश्ता सच मुच सबसे जुदा और मजबूत माना गया है। भाई दूज और रक्षाबंधन जैसे पर्व इस बंधन को और भी ज्यादा मजबूत बना देते हैं। दीवाली के दूसरे दिन के बाद अधिकतर घरों में भाई दूज मनाने की परंपरा होती है। भाईदूज में हर बहन कुमकुम एवं अक्षत से अपने प्यारे भाई के माथे पर तिलक लगाती है और उसके उज्जवल भविष्य के लिये आर्शिवाद देती है। इसके बाद भाई अपनी बहन को पैसे या कोई उपहार देता है। क्या आप जानना चाहते हैं कि भारत में भाईदूज इतनी हंसी खुशी के साथ क्यूं मनाया जाता है? आइये जानते हैं इसका कारण -

भाईदूज से जुड़ी कथा-
भाईदूज को 'यम द्वितीया' भी कहते हैं। कहते हैं कि इसी दिन यम देवता ने अपनी बहन यमी (यमुना) को दर्शन दिये थे, जो कि बहुत दिनों से उनसे मिलने के लिये परेशान थी। फिर यम उसके घर पर आए और यमी ने उनका खूब खुले दिल से स्वागत किया। फिर यम ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि इस दिन यदि भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी मुक्ति हो जाएगी। एक दूसरी कथा में भगवान श्री कृष्ण ने दानव, नरकासुर का वध किया था। फिर वह अपनी बहन सुभद्रा के पास गए और उनकी बहन ने उनका तिलक कर के स्वागत किया।
भाईदूज का महत्व
हर भारतीय त्योहार की तरह भाईदूज का भी अपना अगल महत्व है। यह परिवार को पास लाने और भाई-बहन के प्यार को मजबूत करने का त्योहार है।



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