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Yashoda Jayanti 2023: महिलाएं इस व्रत से पाएं श्रीकृष्ण जैसी संतान पाने का आशीर्वाद
हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती के रूप में जाना जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की प्यारी मैया यशोदा का जन्मोत्सव मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण को जन्म भले ही देवकी ने दिया था, मगर उनकी माता के तौर पर यशोदा को ही याद किया जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन की बहुत महत्ता है। माना जाता है जो जातक यशोदा जयंती धूमधाम से मनाता है, उससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण स्वयं अपना आशीर्वाद देते हैं। इस लेख के माध्यम से जानते हैं इस साल यशोदा जयंती किस दिन मनाई जाएगी और इस तिथि का क्या महत्व है।

यशोदा जयंती 2023
फाल्गुन कृष्ण षष्ठी तिथि का शुभारंभ: 11 फरवरी को सुबह 9 बजकर 5 मिनट से
फाल्गुन कृष्ण षष्ठी तिथि का समापन: 12 फरवरी को सुबह 9 बजकर 47 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार यशोदा जयंती का पर्व 12 फरवरी को मनाया जाएगा।
पूजा का मुहूर्त: 12 फरवरी 2023 को सुबह 09 बजकर 54 मिनट से सुबह 11 बजकर 17 मिनट तक

यशोदा जयंती पूजा विधि
यशोदा जयंती के दिन जातक प्रातः काल उठ जाए। स्नान आदि से निवृत्त होकर माता यशोदा का ध्यान करें। आप ध्यान रखें की पूजा के लिए माता यशोदा की भगवान कृष्ण की गोद में लिए हुए तस्वीर का चुनाव करें। अब पूजा के लिए तस्वीर को स्थापित करें। यदि आपके पास माता यशोदा की तस्वीर नहीं है तो उनका ध्यान करते हुए भगवान श्री कृष्ण के सामने दीप प्रज्वलित करें। इसके पश्चात् माता यशोदा को लाल चुनरी अर्पित करें। यशोदा माता को मिष्ठान और कान्हा जी को मक्खन का भोग लगाएं। अब माता यशोदा और भगवान कृष्ण की आरती करें। अब गायत्री मंत्र का जाप करें। पूजा के समापन के पश्चात् सच्चे मन से अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।

यशोदा जयंती का महत्व
माता यशोदा को ममता की मूरत माना जाता है। यशोदा जयंती की तिथि एक मां और संतान के निश्छल प्रेम को दर्शाता है। महिलाओं के लिए यशोदा जयंती का दिन बहुत विशेष होता है। वह अपनी संतान की अच्छी सेहत, लंबी आयु और जीवन में कामयाबी की कामना करती हैं। यशोदा जयंती का व्रत करने वाली महिलाओं को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इस मौके पर यशोदा माता और भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है।
यशोदा जयंती के मौके पर कृष्ण मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया जाता है। इस दिन भक्त पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन में अपना समय बिताते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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