Latest Updates
-
Captain Smit Machchhar: कैप्टन 'स्मित मच्छर' के सरनेम का क्या है मतलब? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी -
नुसरत भरूचा की रीढ़ की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर, एयरलिफ्ट कर बाली से लाई गईं मुंबई, वीडियो देख फैंस हुए परेशान -
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2026 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि -
Gandhi Jayanti Wishes 2026: हाथ में लाठी थी...गांधी जयंती पर अपनों को ये खास मैसेज भेजकर दें शुभकामनाएं -
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि
Sita Navami 2026: सीता नवमी कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Sita Navami 2026: वैशाख महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं, जिनमें सीता नवमी का विशेष महत्व है। यह दिन माता सीता के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सीता नवमी का पर्व मां सीता के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसलिए इसे सीता जयंती या जानकी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता सीता और भगवान राम का पूजन किया जाता है। कई लोग पूजा-पाठ के अलावा व्रत भी रखते हैं। हिंदू धर्म में माता सीता को आदर्श पत्नी और नारी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि सुहागिन महिलाएं माता सीता का पूजन करें, तो उन्हें सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। तो आइए, जानते हैं इस साल सीता नवमी कब मनाई जाएगी, क्या है शुभ मुहूर्त और महत्व -

कब है सीता नवमी 2026? (Sita Navami 2026 Kab Hai?)
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार को रात 07 बजकर 21 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 25 अप्रैल 2026, शनिवार को शाम 06 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, इस बार सीता नवमी 25 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
सीता नवमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
सीता नवमी के दिन पूजा करने का सबसे अच्छा समय सुबह 10 बजकर 58 मिनट से दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस दौरान लगभग 2 घंटे 36 मिनट का समय पूजा, मंत्र जाप और आराधना के लिए उत्तम माना गया है।
सीता नवमी का महत्व
हिंदू धर्म में सीता नवमी का पर्व बेहद पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन माता सीता का जन्म हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मिथिला के राजा जनक जब यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए खेत में हल चला रहे थे, तभी उन्हें भूमि के नीचे से एक कलश में माता सीता कन्या रूप में प्राप्त हुई थीं। इसलिए उन्हें "भूमि पुत्री" कहा जाता है। इसलिए वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता जनमोत्स्व मनाया जाता है। यह पर्व आदर्श नारीत्व, त्याग, धैर्य और पवित्रता का प्रतीक भी है। मान्यता है कि इस दिन माता सीता और भगवान राम की पूजा-अर्चना करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास बढ़ता है। साथ ही, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
सीता नवमी पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद पूजा और व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल को गंगा जल से साफ करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें।
पूजा के दौरान फूल, माला, शृंगार की वस्तुएं, चावल, रोली, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें।
'श्री जानकी रामाभ्यां नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।
सीता नवमी की व्रत कथा और सीता चालीसा का पाठ करें।
अंत में तिल के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाकर माता सीता और भगवान राम की आरती करें।



Click it and Unblock the Notifications
